EV खरीदने में कौन सा राज्य सबसे आगे? चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने, जानिए किस राज्य ने मारी बाजी

Electric Vehicles India: इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग भारत में लगातार बढ़ रही है। जिसमें सामने आए आंकड़ें बताते है कि उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा जहां 4 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हुए थे।
Uttar Pradesh has been at the forefront of EV purchases
EV इस राज्य में सबसे ज्यादा बिका।Source. Pixabay
Published on
Updated on

EV Sales State Wise: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। देखा गया है कि साल 2025 में देश में 23 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हुए और नए वाहनों की कुल बिक्री में EV की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत रही। ऐसे में आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा जहां 4 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हुए। लेकिन सिर्फ कुल बिक्री के आंकड़े देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि किस राज्य में EV सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

यूपी में सबसे ज्यादा EV रजिस्ट्रेशन

वाहन पोर्टल के आंकड़ें यह बताते है कि 2025 में उत्तर प्रदेश में 4,04,908 इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हुए। यह देश में दर्ज कुल EV रजिस्ट्रेशन का करीब 18 प्रतिशत था। इसके बाद महाराष्ट्र में 2,66,524 और कर्नाटक में करीब 2 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। साथ ही तमिलनाडु और दिल्ली भी बड़े EV बाजारों में शामिल रहे।

वहीं उत्तर प्रदेश के आंकड़ों में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बड़ी हिस्सेदारी रही है। यही वजह है कि राज्य का कुल EV रजिस्ट्रेशन दूसरे राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे में EV की लोकप्रियता समझने के लिए सिर्फ संख्या नहीं बल्कि कुल वाहन बाजार में उनकी हिस्सेदारी देखना भी जरूरी है।

EV अपनाने में कर्नाटक और केरल की तस्वीर अलग

बता दें कि नीति आयोग के India Electric Mobility Index 2025 के आंकड़ों के मुताबिक निजी EV रजिस्ट्रेशन की हिस्सेदारी कर्नाटक में करीब 11 प्रतिशत और केरल में 12 प्रतिशत रही। वहीं उत्तर प्रदेश में यह हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत थी। इससे तस्वीर थोड़ी बदल जाती है। जिसका सीधा मतलब है कि यूपी में EV की कुल संख्या ज्यादा है लेकिन राज्य के पूरे निजी वाहन बाजार की तुलना में EV का हिस्सा कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों से कम है। इसलिए किसी राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच समझने के लिए कुल रजिस्ट्रेशन के साथ EV penetration देखना भी जरूरी है।

Uttar Pradesh has been at the forefront of EV purchases
World Car-Free Day: 22 सितंबर को क्यों छोड़ी जाती है कार? जानें इतिहास और पर्यावरण पर असर

छोटे और पहाड़ी राज्यों में क्यों धीमी है EV की रफ्तार?

कुछ राज्यों में निजी वाहनों के बीच EV की हिस्सेदारी अभी काफी कम है। ऐसे में नीति आयोग के आंकड़ों में अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम जैसे राज्यों में यह हिस्सेदारी शून्य के आसपास रही। लेकिन इन राज्यों की तुलना यूपी, महाराष्ट्र या कर्नाटक जैसे बड़े वाहन बाजारों से सीधे करना सही नहीं होगा। EV अपनाने पर चार्जिंग स्टेशन, सड़क और भौगोलिक स्थिति, सरकारी नीतियां, वाहन बाजार का आकार और लोगों की खरीद क्षमता जैसे कई कारक असर डालते हैं।

खासकर पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित उपलब्धता इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए भारत में EV की असली तस्वीर समझने के लिए बिक्री की संख्या के साथ-साथ राज्य की कुल वाहन बिक्री में EV की हिस्सेदारी देखना ज्यादा उपयोगी माना जाता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com