

Sunwoda 15C LFP Battery: इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों के लिए रेंज और चार्जिंग टाइम आज भी सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हैं। बता दें कि पेट्रोल-डीजल कार में कुछ मिनट में ईंधन भरवाकर सफर शुरू किया जा सकता है जबकि EV को चार्ज होने में ज्यादा समय लग सकता है। इसी चुनौती को कम करने के लिए दुनियाभर की कंपनियां फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। अब चीन की बड़ी बैटरी निर्माता कंपनी Sunwoda EVB ने अपनी नई 15C LFP बैटरी तकनीक पेश की है जो बेहद तेज चार्जिंग का दावा करती है।
Sunwoda ने दी जानकारी में दावा किया है कि उसकी नई 15C LFP बैटरी को 10 से 70 प्रतिशत तक चार्ज होने में सिर्फ 5 मिनट लग सकते हैं। कंपनी का दावा है कि बैटरी करीब 9 मिनट में 97 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इतना ही नहीं हर एक मिनट की चार्जिंग से करीब 100 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज मिलने का दावा किया जा रहा है। लेकिन असल ड्राइविंग रेंज कार के मॉडल, बैटरी क्षमता, मौसम, ड्राइविंग स्टाइल और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। वहीं Lithium Iron Phosphate बैटरी तकनीक EV सेक्टर में सुरक्षा, लागत और अपेक्षाकृत लंबी बैटरी लाइफ जैसे फायदों के लिए जानी जाती है।
वैसे बता दें कि फास्ट चार्जिंग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बैटरी का तेजी से गर्म होना होता है। ऐसे में कम समय में ज्यादा ऊर्जा बैटरी में पहुंचने पर तापमान बढ़ सकता है जिसका असर सुरक्षा और बैटरी की परफॉर्मेंस पर पड़ सकता है।
लेकिन इसको लेकर Sunwoda का कहना है कि उसकी 15C तकनीक तेज चार्जिंग के दौरान थर्मल स्थिरता बनाए रखने में सक्षम है। कंपनी यह भी बताती है कि सामान्य तापमान में भी बैटरी तापमान को नियंत्रित रख सकती है। अगर यह तकनीक वास्तविक इस्तेमाल में भी इन दावों पर खरी उतरती है तो EV चार्जिंग को लेकर यूजर्स की बड़ी परेशानी कम हो सकती है।
Sunwoda ने बेहद ठंडे मौसम को लेकर भी बड़ा दावा किया है। जिसमें उसने बताया है कि -20 डिग्री सेल्सियस तापमान में बैटरी 10 से 97 प्रतिशत तक सिर्फ 15 मिनट में चार्ज हो सकती है। इस स्थिति में करीब 700 किलोमीटर तक की रेंज मिलने का भी दावा किया गया है। लेकिन अभी के लिए इन आंकड़ों को कंपनी के दावों के तौर पर ही देखना जरूरी है। वास्तविक परिस्थितियों में चार्जिंग स्पीड और रेंज अलग हो सकती है। खासकर भारत जैसे बाजार में जहां तापमान और ड्राइविंग कंडीशन काफी अलग-अलग होती हैं वहां इस तकनीक का असली प्रदर्शन व्यावहारिक इस्तेमाल के बाद ही स्पष्ट होगा।