

How To Reduce Traffic Challans: सड़क पर ट्रैफिक नियम तोड़ना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा पड़ सकता है। क्योंकि जगह-जगह लगे CCTV और डिजिटल कैमरों की मदद से वाहनों पर नजर रखी जा रही है और छोटी सी गलती पर भी ई-चालान घर पहुंच जाता है। ऐसे में अगर हाल ही में आपका 2 से 3 हजार रुपये का चालान कटा है और आपको लगता है कि रकम ज्यादा है या चालान गलत है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ कानूनी रास्तों के जरिए आप चालान पर राहत पाने की कोशिश कर सकते हैं।
बता दें कि लंबित ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए नेशनल लोक अदालत एक अहम विकल्प है। जिसमें लोक अदालतों में छोटे और समझौते योग्य मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाता है। मामले की परिस्थितियों और लागू नियमों के आधार पर जुर्माने में राहत मिल सकती है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर चालान अपने आप आधा या माफ नहीं हो जाता। वहीं राहत मामले की प्रकृति और संबंधित प्राधिकरण के निर्णय पर निर्भर करती है। लोक अदालत में मामला ले जाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और जहां जरूरी हो ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग करनी पड़ सकती है।
जानकारी के लिए बता दें कि कैमरे से ऑटोमैटिक चालान बनने के दौरान कभी-कभी तकनीकी या पहचान संबंधी गलती भी हो सकती है। मसलन किसी दूसरी गाड़ी का उल्लंघन आपके वाहन नंबर से जुड़ जाए या रिकॉर्ड में ऐसी गलती हो जिसके कारण चालान जारी हो गया हो। ऐसी स्थिति में बिना जांचे चालान भरने के बजाय संबंधित आधिकारिक ई-चालान पोर्टल या ट्रैफिक विभाग पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। वाहन की फोटो, दस्तावेज या अन्य जरूरी सबूत अपलोड करने के बाद अधिकारी मामले की जांच करते हैं। गलती साबित होने पर चालान रद्द किया जा सकता है।
देखा गया है कि कई बार ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस या अन्य वैध दस्तावेज उस समय हाथ में नहीं होते जबकि वे वास्तव में वैध होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में संबंधित नियमों के तहत दस्तावेज बाद में प्रस्तुत करने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है। इसलिए चालान कटने के बाद संबंधित ट्रैफिक पुलिस या कोर्ट की प्रक्रिया की जानकारी लें और अपने ओरिजिनल वैध दस्तावेज समय पर पेश करें। राहत मिलना मामले और लागू कानून पर निर्भर करेगा।
सलाह दी जाती है कि चालान को नजरअंदाज करना समस्या बढ़ा सकता है। लंबे समय तक भुगतान न होने पर मामला आगे की कानूनी प्रक्रिया में जा सकता है। अगर जुर्माना अधिक है या चालान को लेकर विवाद है तो संबंधित कोर्ट में अपनी बात और सबूत पेश करना बेहतर विकल्प है। वहीं ध्यान रखें की चालान कम या माफ होना कोई गारंटी नहीं है। हमेशा अपने राज्य के मौजूदा ट्रैफिक नियम और आधिकारिक पोर्टल की प्रक्रिया को ही आधार बनाएं।