

Ethanol Blending India: देश में बढ़ते बदलाव और महंगाई के बीच सरकार ने पेट्रोल की कीमतों और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बता दें कि अब भारत में E20 के बाद E22, E25, E27 और E30 जैसे हाई एथेनॉल-पेट्रोल ब्लेंड वाले नए फ्यूल स्टैंडर्ड लागू करने की तैयारी हो रही है। जिसके आने से पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा हो सकती है। वहीं सरकार कायह फैसला उस समय र आया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन प्रभावित हो चुकी है। वहीं देश में एथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ी है जिसको सरकार अब इस्तेमाल में लाने की कोशिश कर रही है।
Bureau of Indian Standards यानी BIS ने इस 15 मई को नए फ्यूल स्टैंडर्ड जारी किए थे। जिसके अंदर E22, E25, E27 और E30 जैसे नए ब्लेंडेड फ्यूल्स के लिए तकनीकी और सुरक्षा नियम तय किए गए हैं। वहीं बता दें कि इन फ्यूल्स में बिना पानी वाले एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाएगा। जिसको लेकर नए नियमों में फ्यूल की क्वालिटी, मिश्रण की सीमा, सेफ्टी पैरामीटर्स और टेस्टिंग मेथड्स को भी शामिल किया गया है। जिससे सरकार का यह मकसद तो साफ है कि वह भारत में धीरे-धीरे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम करते हुए घरेलू एथेनॉल इंडस्ट्री को बढ़ावा देना चाहते है।
इस नए नियम के आने के बाद से लोगों की बीच यह चिंता भी शुरू हो रही है कि उनकी गाड़ी पर इसका क्या असर होगा? जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल देश में ज्यादातर वाहन E10 यानी 10% एथेनॉल वाले पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन हुए हैं। वहीं बताया जा रहा है कि पूरी तरह E20 कंप्लायंट गाड़ियां अप्रैल 2026 के बाद बड़े स्तर पर बाजार में आने की उम्मीद है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि अगर पेट्रोल में 25% तक एथेनॉल मिलाया जाएगा तो क्या मौजूदा गाड़ियों के इंजन, माइलेज और परफॉर्मेंस पर असर देखने को मिलेगा।
ऐसे में लोगों की इसी चिंता को दूर करने के लिए Automotive Research Association of India यानी ARAI को विस्तृत अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस स्टडी में E10 और E20 कंप्लायंट वाहनों पर काम किया जाएगा ताकि पता लगाया जा सके कि ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग से इंजन लाइफ, माइलेज और उत्सर्जन पर क्या असर पड़ता है?
विशेषज्ञों इस मामले पर बताते है कि फिलहाल भारत के पास एथेनॉल का सरप्लस स्टॉक मौजूद है। जिसको देखते हुए सरकार इसे ज्यादा मात्रा में पेट्रोल में मिलाकर तेल आयात का खर्च कम करना चाहती है। ऐसे में All India Distillers Association ने सरकार के इस कदम को महत्वपूर्ण और समयोचित कदम बताया है। लेकिन इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है किसी भी बड़े बदलाव से पहले वाहनों को 60,000 से 70,000 किलोमीटर तक टेस्ट करना जरूरी होता है ताकि लंबे समय के प्रभाव को सही से समझा जा सके।
वहीं अब यह कहा जा रहा है कि अगर सरकार E20 से आगे बढ़ती है तो आने वाले सालों में भारत का फ्यूल सिस्टम पूरी तरह बदल सकता है। जिसके बाद बाजार में आने वाली गाड़ियों के मॉडल्स पर भी उसका असर देखने को मिलेगा।