इलेक्ट्रिक नहीं हाइब्रिड कारें हैं फ्यूचर, जाने क्यों हैं इतनी खास
हाइब्रिड वाहन यानी ज्यादा पावर, बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी और कम कार्बन उत्सर्जन। हाइब्रिड कारें फ्यूल इंजन और इलेक्ट्रिक पावर के बीच का सबसे अच्छा विकल्प हैं, जो पारंपरिक कारों और सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच ग्राहकों को एक शानदार ऑप्शन देता है।
- Written By: रीना पंवार
(सौजन्य सोशल मीडिया)
Hybrid Cars: पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण भारत में लोग अब इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को तरजीह देने लगे हैं। इलेक्ट्रिक कारों में भी ग्राहकों को ज्यादा झुकाव हाइब्रिड कारों की तरफ है। भारत समेत विदेशों में भी हाइब्रिड कारें खूब पसंद की जा रही हैं और हर साल इन कारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठता हैं कि हाइब्रिड कारों में ऐसा क्या खास है जो लोग इलेक्ट्रिक कारों से भी ज्यादा हाइब्रीड कारों को पसंद कर रहे हैं।
ऐसे होते हैं हाइब्रिड वाहन
हाइब्रिड वाहन ऐसे वाहन होते हैं जिसमें दो टाइप के इंजन होते हैं। इन वाहनों में एक पेट्रोल या डीजल इंजन होता है और दूसरा इलेक्ट्रिक इंजन होता है। इसी टेक्नोलॉजी को हाइब्रिड कहते हैं क्योंकि इसमें दोनों इंजन वाहन को पावर जेनेरेट करके देते हैं। कुल मिलाकर हाइब्रिड वाहन (HEV) एक से ज्यादा ईंधन के विकल्प के साथ आता है। भारतीय बाजार में दो तरह की हाइब्रिड कारें हैं, माइल्ड हाइब्रिड और स्ट्रांग हाइब्रिड। हाइब्रिड वाहन की खास बात ये होती है कि इसकी बैटरी इंटर्नल सिस्टम के द्वारा चार्ज हो जाती है, अलग से इसे चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। हाइब्रिड वाहन में जब गाड़ी बैटरी से चलती है तो उस वक्त फ्यूल कि बचत होती है।
ऐसे काम करती है हाइब्रिड कार
आम तौर पर हाइब्रिड कारों में पेट्रोल या डीजल इंजन का इस्तेमाल होता है। इनमें एक या एक से ज़्यादा इलेक्ट्रिक मोटर का भी यूज होता है, जिन्हें बैटरी पैक से बिजली मिलती है। ये दोनों एनर्जी सोर्स एक साथ या स्वतंत्र रूप से कार को पावर सप्लाई कर सकते हैं। ऐसे कॉम्बिनेशन के कारण हाइब्रिड कारों को चलाने के लिए कम फ्यूल की जरूरत पड़ती है जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और इसे चलाना भी सस्ता पड़ता है।
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इसके साथ ही सभी हाइब्रिड कार को चार्ज करने के लिए प्लग इन करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। कुछ अपनी बैटरी को खुद चार्ज कर सकती हैं। ज़्यादा गति से गाड़ी चलाते समय या रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का उपयोग करके धीमा करते समय बैटरी खुद से चार्ज हो जाती है। हाइब्रिड वाहन फ्यूल एफिशिएंट होते है। ये फ्यूल इंजन का इस्तेमाल तभी करते हैं, जब वाहन पथरीले या ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर हो। कार की स्पीड ज्यादा होने पर भी ये कारें फ्यूल इंजन का इस्तेमाल करती हैं। हाइब्रिड कार जब कम स्पीड में रहती हैं तो बैटरी का इस्तेमाल करती है और जैसे ही स्पीड बढ़ती है तो कार ऑटोमैटिकली पेट्रोल पर शिफ्ट हो जाती हैं।
क्यों ज्यादा पसंद की जा रही हाइब्रिड कारें
हाइब्रिड कारों में कई सारे ऐसे फीचर्स हैं जो इसे इलेक्ट्रिक कारों से बेहतर बनाते हैं। इनका माइलेज इलेक्ट्रिक वाहन के मुकाबले ज्यादा बेहतर है। सबसे महत्वपूर्ण फीचर हाइब्रिड कारों का ये है कि ये कारें फ्यूल और बैटरी दोनों पर आसानी से चलती है, जिसकी वजह से इनको चार्ज करने की चिंता नहीं रहती। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की समस्या है। लम्बी दूरी तय करने में चार्जिंग खत्म भी हो जाये तो हाइब्रीड कार को फ्यूल पर चला सकते हैं। जबकि ऐसी परिस्थिति में इलेक्ट्रिक कार आपको परेशानी में डाले रहती हैं।
कम करती हैं कार्बन उत्सर्जन
हाइब्रिड कारें पर्यावरण के लिहाज से भी सही हैं क्योंकि ये कार्बन उत्सर्जन कम करती है। प्रदर्शन के मामले में हाइब्रिड कारें बेहतर हैं। पेट्रोल या डीजल इंजन का इलेक्ट्रिक मोटर के साथ संयोजन ड्राइविंग करते अधिक शक्ति उपलब्ध कराता है।
