हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होते ही बढ़ा तेल संकट, PM मोदी की बड़ी अपील सोच-समझकर इस्तेमाल करें पेट्रोल-डीजल

Hormuz Strait Crisis: पश्चिम एशिया और ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। समुद्री जलमार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर होगा।
Oil Crisis Escalates as Strait of Hormuz Strait Crisis PM Modi Issues Major Appeal
Hormuz Strait Crisis (Source. Freepik)
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Hormuz Strait Crisis And Impact On India: पश्चिम एशिया के तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। बता दें कि समुद्री जलमार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है। इसको देखते हुए Narendra Modi ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करने की अपील भी की है।

प्रधानमंत्री ने लोगों को सदेंश देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच ईंधन की बचत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत आयात होने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर अपनी निर्भरता कम करेगा तो देश का विदेशी मुद्रा खर्च बचेगा और युद्ध का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं होगा।

क्यों बढ़ रही है भारत की टेंशन?

देखा जा रहा है कि ईरान से जुड़े तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पर लगातार पड़ रहा है। वहीं रुपये की कमजोरी ने भारत की चिंता को और भी बढ़ा दिया है। बता दें कि महंगा तेल खरीदने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा होने लगता है। यही वजह है कि सरकार अब लोगों से ईंधन बचाने की अपील कर रही है ताकी इस बोझ को कम किया जा सके।

रोजाना करोड़ों लीटर तेल खपत करता है भारत

सरकारी के दिए आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजाना करीब 55 लाख बैरल यानी 87.45 करोड़ लीटर तेल का इस्तेमाल किया जाता है। देखा जा रहा है कि तेल खपत के मामले में भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश बना गया है। वहीं बता दें कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 88% कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है और 2026 में देश ने कच्चे तेल के आयात पर करीब 134.7 अरब डॉलर खर्च किए थे। जिसका मतलब साफ है कि वैश्विक संकट का असर भारत पर सबसे ज्यादा तेजी से होगा।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर सबसे बड़ा उपभोक्ता

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार भारत देश में सबसे ज्यादा डीजल का इस्तेमाल होता है। जिसकी हिस्सेदारी करीब 37 से 39% तक की है। वहीं डीजल की मांग ट्रक, बस, खेती और भारी वाहनों में सबसे ज्यादा की जाती है। वहीं पेट्रोल को देखे तो इसकी हिस्सेदारी 14 से 16% के आसपास है जो मुख्य रूप से कार और बाइक वाले सड़क वाहनों में किया जाता है।

सरकार अब EV और Flex Fuel पर दे रही जोर

वहीं देश में बढ़ते दामों को देखते हुए सरकार भविष्य में तेल पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल और फ्लेक्स फ्यूल जैसे विकल्पों को तेजी से लोगों को बढ़ाने के लिए कह रही है। वहीं यह भी माना जा रहा है कि अगर समय रहते ईंधन की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा पर फोकस नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आम लोगों पर महंगाई का बड़ा बोझ पड़ सकता है।

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