

Highway Toll System: लंबे सफर के दौरान टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें अब जल्द ही बीते जमाने की बात हो सकती हैं। बता दें कि सरकार ने नेशनल हाईवे के टोल सिस्टम को पूरी तरह बैरियर-फ्री बनाने की तैयारी तेज कर दी है। जिसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में वाहन चालकों को टोल देने के लिए गाड़ी रोकने या स्पीड कम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि Fastag के साथ Automatic Number Plate Recognition (ANPR) तकनीक का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
जानकारी में बताया जा रहा है कि ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार नेशनल हाईवे के सभी टोल बूथ को बैरियर-फ्री करने पर काम कर रही है। योजना के मुताबिक दिसंबर 2026 के अंत तक 70 फीसदी से ज्यादा टोल बूथ बैरियर-फ्री हो जाएंगे। वहीं मार्च 2027 तक इस व्यवस्था को 100 फीसदी लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही बताया जा रहा है कि देश में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा Fastag जारी किए जा चुके हैं और नेशनल हाईवे पर इसकी पहुंच 98 फीसदी से अधिक हो चुकी है। ऐसे में नए सिस्टम को लागू करने के लिए जरूरी डिजिटल ढांचा पहले से काफी हद तक तैयार है।
नए सिस्टम को लेकर सबसे खास बात है कि इसमें Multi-Lane Free Flow (MLFF) टोलिंग तकनीक वाला है। इसका परीक्षण 11 मई 2026 को मुंबई के एक टोल प्लाजा पर किया जा चुका है। इसमें टोल प्लाजा पर पारंपरिक बैरियर नहीं होंगे। वहीं जब आपकी कार टोल जोन से गुजरेगी हाईटेक कैमरे नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे। इसके बाद Fastag या लिंक्ड अकाउंट के जरिए टोल की रकम अपने आप कट जाएगी। जो भविष्य में लंबी लाइन में खड़े होने और बैरियर खुलने का इंतजार करने की जरूरत को कम कर देगी।
नितिन गडकरी का इस नई तकनीक को लेकर कहना है कि पहले टोल प्लाजा पर एक वाहन को औसतन करीब 12 मिनट रुकना पड़ता था। लेकिन बैरियर-फ्री सिस्टम से यह समय लगभग खत्म हो जाएगा। इसका सीधा फायदा समय और ईंधन की बचत के रूप में लोगों को मिलेगा। वहीं एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया गया कि वाहनों के टोल पर नहीं रुकने से हर साल करीब 5,250 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत हो सकती है। साथ ही Fastag से टोल कलेक्शन में पहले ही 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जिससे सरकार को 7,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिला है।
इसको देखने के बाद कुल टोल रेवेन्यू 82,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। वहीं सिस्टम पूरी तरह लागू होने पर सरकार को हर साल 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जिसके बाद टोल बूथ संचालन का खर्च भी 12 फीसदी से घटकर करीब 2 से 3 फीसदी रह सकता है।