भारतीय कारों के लिए यूरोप का रास्ता हुआ आसान, 2.5 लाख गाड़ियों पर सिर्फ 8% ड्यूटी, 5 साल में खत्म होगा टैक्स

India EU Free Trade Agreement: भारत में बनी पैसेंजर कारों के लिए यूरोपीय बाजार में एंट्री आसान होने वाली है और इसके पीछे कि वजह नए नियम को बताया जा रहा है जो भविष्य कि नई तस्वीर बन सकता है।
Europe opens up for Indian cars Only 8% duty on 2.5 lakh vehicles over 5 years
India EU को लेकर आए नए नियम।Source. Social Media
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Indian Cars Export Europe: भारत में बनी पैसेंजर कारों के लिए यूरोपीय बाजार में एंट्री आसान होने वाली है। इसकी वजह India-EU Free Trade Agreement के तहत यूरोपीय संघ हर साल 2.5 लाख भारतीय निर्मित पैसेंजर वाहनों को रियायती आयात शुल्क पर अपने बाजार में आने की अनुमति देगा। ड्राफ्ट टेक्स्ट ने जानकारी दी है कि शुरुआत में इन वाहनों पर सिर्फ 8 फीसदी ड्यूटी लगेगी और धीरे-धीरे इसे खत्म किया जाएगा। सालाना कोटा भी बढ़कर 10वें साल से 4 लाख वाहनों तक पहुंच जाएगा। बता दें कि यह समझौता इस साल जनवरी में पूरा होने की घोषणा के बाद अब अगले चरण में है और इसके बाद भारत में बनी कारों के लिए यूरोप में निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं।

8% से शुरू होगी ड्यूटी, 5 साल में जीरो

ड्राफ्ट ने इसको लेकर जानकारी दी है कि ICE (पेट्रोल-डीजल) और Hybrid Electric Vehicles की कीमत अगर CIF आधार पर 50,000 यूरो तक है तो इन पर 8 फीसदी रियायती शुल्क लागू होगा। वहीं दूसरे साल यह ड्यूटी 6 फीसदी, तीसरे साल 4 फीसदी और चौथे साल 2 फीसदी रह जाएगी। पांचवें साल इसे पूरी तरह शून्य कर दिया जाएगा। इसके साथ ही पहले साल 2.5 लाख वाहनों का कोटा होगा जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए 10वें साल से 4 लाख यूनिट हो जाएगा। कोटे से ज्यादा वाहनों पर सामान्य MFN ड्यूटी लागू होगी।

महंगी कारों के लिए भी बड़ा फायदा

बता दें कि 50,000 यूरो से ज्यादा कीमत वाली ICE और HEV कारों पर शुरुआत में कोई कोटा आधारित रियायत नहीं होगी। लेकिन इन वाहनों पर लगने वाली ड्यूटी भी समझौते के 10वें साल तक घटकर शून्य हो जाएगी। इसका मतलब यह है कि भारतीय ऑटो कंपनियों को सिर्फ किफायती कारों ही नहीं बल्कि प्रीमियम सेगमेंट में भी यूरोपीय बाजार तक पहुंच बनाने का फायदा मिल सकता है।

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EV के लिए अलग कोटा और नियम

Battery Electric Vehicle (BEV), Plug-in Hybrid Electric Vehicle (PHEV) और ICE/HEV के अलावा दूसरी तकनीक वाली पैसेंजर कारों के लिए अलग TRQ रखा गया है। वहीं 40,000 यूरो तक की कारों के लिए पांचवें साल से 27,500 वाहनों का कोटा 8 फीसदी ड्यूटी पर मिलेगा। यह नौवें साल तक 60,500 और 14वें साल से 1.25 लाख वाहनों तक बढ़ सकता है। नौवें साल से ड्यूटी खत्म हो जाएगी।

40,000 से 60,000 यूरो वाली कारों के लिए पांचवें साल 16,250 वाहनों का कोटा होगा जो 14वें साल से 75,000 तक पहुंच सकता है। वहीं 60,000 यूरो से महंगी कारों के लिए कोटा 6,250 से शुरू होकर 14वें साल से 25,000 हो सकता है।

यहां CIF में कार की कीमत के साथ शिपिंग और इंश्योरेंस लागत भी शामिल होती है। ऐसे में यह समझौता भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का अहम मौका साबित हो सकता है

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