

Government Bans Pre Booking Tip On Ola Uber: अक्सर ऑफिस जाने की जल्दी हो या कहीं और पहुंचने की हड़बड़ी, ओला-उबर या रैपिडो जैसे ऐप्स पर कैब बुक करते समय हमें एक विकल्प दिखाई देता था, 'जल्दी राइड पाने के लिए टिप दें'। यात्रियों की इसी मजबूरी का फायदा उठाने वाले इस खेल पर अब भारत सरकार ने पूरी तरह से लगाम लगा दी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक सख्त आदेश जारी करते हुए सभी कैब एग्रीगेटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से 'प्री-बुकिंग टिप' वाले फीचर्स को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कैब कंपनियों को स्पष्ट कर दिया है कि बुकिंग पूरी होने से पहले टिप मांगना नियमों के विरुद्ध है। सरकार ने 11 अगस्त 2026 को जारी अपनी एडवाइजरी में कहा कि मोबाइल ऐप्स पर ऐसे किसी भी फीचर की अनुमति नहीं दी जाएगी, जो यात्रियों पर अतिरिक्त भुगतान का दबाव बनाते हों। यह कदम मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 के नियमों के तहत उठाया गया है, जिसका उल्लंघन करने पर कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
मंत्रालय ने अपनी एडवाइजरी में उन सभी फीचर्स और संदेशों को चिन्हित किया है जिन्हें ऐप्स को तुरंत हटाना होगा। इनमें प्रमुख हैं:
एडवांस टिप: बुकिंग कन्फर्म होने से पहले पैसे मांगना।
चूज एन एड ऑन: एक्स्ट्रा सर्विस के नाम पर अतिरिक्त चार्ज।
इंप्रूव योर चांसेज ऑफ क्विकर राइड: यह लालच देना कि पैसे देने पर ड्राइवर जल्दी मिलेगा।
सरकार का मानना है कि इस तरह के विकल्प यात्रियों को यह महसूस कराते हैं कि अगर उन्होंने एक्स्ट्रा पैसे नहीं दिए, तो उन्हें बेहतर सर्विस नहीं मिलेगी या उनकी राइड कन्फर्म नहीं होगी।
सरकार का उद्देश्य कैब बुकिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और दबाव मुक्त बनाना है। आमतौर पर देखा गया है कि पीक ऑवर्स के दौरान कंपनियां यात्रियों को यह मैसेज दिखाती हैं कि यदि वे ड्राइवर को टिप के रूप में अतिरिक्त भुगतान करते हैं, तो उनकी सर्च बेहतर होगी और राइड जल्दी मिलेगी। सरकार के अनुसार, एक्स्ट्रा पेमेंट को सर्विस की गुणवत्ता से जोड़ना पूरी तरह गलत है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने भी पहले इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद अब परिवहन मंत्रालय ने अपनी स्थिति साफ कर दी है।
नए नियमों के अनुसार, टिप देना बंद नहीं किया गया है, बल्कि इसके तरीके को बदला गया है।
1. यात्रा के बाद ही टिप: टिप केवल सफर पूरा होने के बाद ही दी जा सकेगी।
2. पूरी तरह स्वैच्छिक: टिप देना यात्री की अपनी इच्छा पर निर्भर करेगा, ऐप उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं कर सकता।
3. ड्राइवर को मिलेगा 100% हिस्सा: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यात्री द्वारा दी गई टिप की पूरी राशि ड्राइवर के पास जाएगी। कंपनियां इसमें से अपना कोई कमीशन या हिस्सा नहीं काट सकतीं।
केंद्र सरकार के इस फैसले से उन लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो रोजाना कैब सेवाओं का उपयोग करते हैं। अब यात्रियों को इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि एक्स्ट्रा पैसे न देने पर उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ेगा। मंत्रालय ने सभी एग्रीगेटर्स को निर्देश दिया है कि वे अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म का तुरंत रिव्यू करें और नियमों के खिलाफ पाए जाने वाले किसी भी इंटरफेस या पेमेंट ऑप्शन को तुरंत हटा दें।
इस फैसले के साथ ही सरकार ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ग्राहकों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अब देखना यह है कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां अपने ऐप के इंटरफेस में कितनी जल्दी ये बदलाव लागू करती हैं।