

Highlight:
नई गाड़ी खरीदने से पहले ऑफर के बाद होने वाले खर्चों पर भी ध्यान देने होगा।
एक ही मॉडल और वैरिएंट की कीमत कम से कम तीन डीलरशिप से पता करें।
डिलीवरी के समय इनवॉइस, इंश्योरेंस पॉलिसी, ओनर मैनुअल और वारंटी के दस्तावेज लें।
Things To Keep In Mind Before Buying A New Car: फेस्टिव सीजन में कार और बाइक पर मिलने वाले डिस्काउंट देखकर नई गाड़ी खरीदने का मन बन सकता है। लेकिन सिर्फ बड़ी छूट के विज्ञापन पर भरोसा करना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। कई बार कम कीमत का ऑफर देने के बाद इंश्योरेंस, एक्सेसरीज, फाइनेंस और दूसरे चार्ज के जरिए कुल खर्च बढ़ जाता है। इसलिए नई कार या बाइक की डिलीवरी लेने से पहले कीमत से लेकर गाड़ी की कंडीशन तक हर चीज जांचना जरूरी है।
एक ही मॉडल और वैरिएंट की कीमत कम से कम तीन डीलरशिप से पता करें। सभी से लिखित ऑन-रोड प्राइस मांगें, जिसमें एक्स-शोरूम कीमत, रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और दूसरे चार्ज अलग-अलग लिखे हों। सिर्फ डिस्काउंट की रकम देखकर फैसला न करें। यह भी देखें कि कहीं ज्यादा छूट देने वाला डीलर दूसरे चार्ज बढ़ाकर कुल कीमत तो नहीं बढ़ा रहा है।
डीलरशिप से ही मोटर इंश्योरेंस खरीदना जरूरी नहीं है। ग्राहक अपनी पसंद की इंश्योरेंस कंपनी से पॉलिसी ले सकते हैं। IRDAI के नियमों बताते है कि पॉलिसीधारक को अपनी पसंद के इंश्योरर या एजेंट से मोटर इंश्योरेंस लेने का अधिकार है। इसलिए अलग-अलग कंपनियों के प्रीमियम, कवरेज और ऐड-ऑन की तुलना करें। इसी तरह कार या बाइक लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर न देखें। प्रोसेसिंग फीस, लोन की अवधि और पूरी अवधि में चुकाई जाने वाली कुल रकम भी समझें। कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता।
सीट कवर, फ्लोर मैट, मड फ्लैप और डोर वाइजर जैसे सामान कई बार पैकेज में दिए जाते हैं। इन्हें लेने से पहले हर एक्सेसरी की अलग कीमत पूछें। जो चीजें जरूरी नहीं हैं उन्हें खरीदने से मना कर दें। इससे अतिरिक्त खर्च से बच सकते हैं।
नई कार या बाइक की डिलीवरी दिन की रोशनी में लें। बॉडी पर स्क्रैच, डेंट, पेंट, टायर और शीशे की जांच करें। ओडोमीटर, हेडलाइट, इंडिकेटर और इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स भी चेक करें। गाड़ी और टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर देखें।
डिलीवरी के समय इनवॉइस, इंश्योरेंस पॉलिसी, ओनर मैनुअल और वारंटी के दस्तावेज लें। डीलर ने जिन एक्सेसरीज या सुविधाओं का वादा किया है उनका बिल या डिलीवरी चेकलिस्ट में होना भी जांचें। सभी चीजें संतोषजनक होने के बाद ही डिलीवरी स्वीकार करें। जल्दबाजी में की गई छोटी चूक बाद में परेशानी बन सकती है।