इंजन ऑयल समय पर नहीं बदला तो पड़ सकती है भारी चपत, जानें सही समय और सावधानियां

कार का इंजन ऑयल समय पर नहीं बदला जाए तो यह लापरवाही बड़ा आर्थिक झटके का सामना भी करा सकती है। इंजन ऑयल बदलने में देरी धीरे-धीरे गाड़ी के इंजन को अंदर से नुकसान पहुंचाती है।
इंजन ऑयल समय पर नहीं बदला तो पड़ सकती है भारी चपत, जानें सही समय और सावधानियां
engine oil को बदलने का समय। (सौ. Freepik)
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अगर आप अपनी कार का इंजन ऑयल समय पर नहीं बदलवा रहे हैं, तो यह लापरवाही आपको किसी भी दिन बड़ा आर्थिक झटका दे सकती है। इंजन ऑयल बदलने में की गई देरी धीरे-धीरे गाड़ी के इंजन को अंदर से नुकसान पहुंचाती है, जिसका असर परफॉर्मेंस, माइलेज और मेंटेनेंस कॉस्ट पर साफ दिखता है।

क्यों ज़रूरी है समय पर इंजन ऑयल बदलना?

इंजन ऑयल इंजन के पुर्ज़ों को चिकनाई देकर घर्षण को कम करता है और उसे ज़्यादा गर्म होने से बचाता है। लेकिन जब ऑयल पुराना हो जाता है, तो उसकी क्षमता कम हो जाती है और वह गंदगी इकट्ठा करने लगता है। इससे इंजन पर ज़्यादा लोड पड़ता है, और समय के साथ इंजन फेल होने की नौबत आ सकती है।

इंजन ऑयल कब बदलवाना चाहिए?

हर कार के साथ एक यूज़र मैनुअल आता है, जिसमें साफ लिखा होता है कि इंजन ऑयल कितने किलोमीटर या समय के बाद बदलना चाहिए। सामान्यतः यह समय 5,000 से 10,000 किलोमीटर या 6 महीने से 1 साल के भीतर होता है। "अगर आप सामान्य शहरी इलाकों में गाड़ी चलाते हैं तो मैनुअल का पालन करना काफी होता है, लेकिन अत्यधिक ट्रैफिक, धूलभरे रास्तों या पहाड़ी क्षेत्रों में ड्राइविंग करने वालों को इंजन ऑयल थोड़े अंतराल में ही बदलना चाहिए।"

किस प्रकार का ऑयल, कितनी बार?

  • मिनरल ऑयल: हर 5,000 किलोमीटर पर बदलें
  • सिंथेटिक ऑयल: 7,500 से 10,000 किलोमीटर तक चल सकता है

सही समय पर ऑयल बदलवाने से न केवल इंजन की लाइफ बढ़ती है, बल्कि गाड़ी स्मूद चलती है और फ्यूल इफिशिएंसी भी बनी रहती है।

ऑयल देरी से बदलवाने के नुकसान

अगर ऑयल समय से नहीं बदला गया तो इंजन में ज़्यादा घर्षण होगा, जिससे हीटिंग, पिस्टन लॉकिंग या इंजन सीज़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा, क्योंकि इन समस्याओं की मरम्मत का खर्च हजारों से लेकर लाखों तक जा सकता है।

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