E100 पेट्रोल को मंजूरी, लेकिन एथेनॉल आएगा कहां से? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा बड़ा सवाल

Ethanol Fuel India: केंद्र सरकार ने E100 से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए रास्ता खोल दिया है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 29 अक्टूबर को इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था।
E100 petrol ethanol come from Supreme Court poses a key question to the Central Government
E100 को लेकर सुप्रीम कोर्ट का क्या है कहना।Source. iStock
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  • केंद्र सरकार ने E100 से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का रास्ता खोल दिया है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ईंधन की सप्लाई को लेकर जानकारी मांगी है।

  • फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर चलने वाली होती हैं।

Supreme Court Ethanol Information: भारत में पेट्रोल के विकल्प के तौर पर एथेनॉल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने अब E100 यानी लगभग पूरी तरह एथेनॉल से चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए भी रास्ता खोल दिया है। लेकिन इस फैसले के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अगर ऐसी गाड़ियां सड़कों पर उतरती हैं तो उनके लिए पर्याप्त एथेनॉल की सप्लाई कैसे होगी? जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 29 अक्टूबर को इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। वहीं कोर्ट ने ईंधन की उपलब्धता के साथ किसानों के हित और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की बात कही है।

E100 गाड़ियों को मिली मंजूरी, क्या बदलेगा?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत E85 और E100 जैसे हाई-एथेनॉल फ्यूल पर चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए नियमों में प्रावधान किया गया है।

वहीं फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां खास तकनीक से तैयार होती हैं जिससे वे पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण पर चल सकती हैं। जिसका सीधा मतलब है कि E85 में 85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है जबकि E100 में लगभग पूरा ईंधन एथेनॉल होता है। इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य पेट्रोल कारों में सीधे E100 इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए वाहन का खास तौर पर डिजाइन और सर्टिफाइड होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल की सप्लाई पर उठाए सवाल

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने सुनवाई के दौरान पूछा कि अगर 100% एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को अनुमति दी जाती है तो उनके लिए पर्याप्त ईंधन कहां से आएगा? वहीं केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि इसके लिए बड़े स्तर पर उत्पादन व्यवस्था में बदलाव करने होंगे। यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए सिर्फ गाड़ियों की तकनीक बदलना काफी नहीं होगा बल्कि उत्पादन और वितरण का मजबूत नेटवर्क भी तैयार करना पड़ेगा।

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पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथेनॉल मिलाने की योजना नहीं

इस जानकारी के बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि अभी के लिए पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट 20% से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। जिसका सीधा मतलब है कि E100 गाड़ियों को नियमों में जगह मिलने का मतलब यह नहीं है कि आम पेट्रोल पंपों पर जल्द ही E100 ईंधन मिलने लगेगा।

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किसानों के हित और सप्लाई विवाद पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एथेनॉल नीति बनाते समय किसानों की आर्थिक स्थिति और पर्यावरण को भी महत्व मिलना चाहिए। लेकिन अभी कोर्ट में 2025-26 के एथेनॉल सप्लाई वर्ष के आवंटन को लेकर विवाद चल रहा है। साथ ही VINP Distilleries ने अधिक एथेनॉल आवंटन की मांग की थी जबकि BPCL ने कर्नाटक हाई कोर्ट के निर्देश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने जून में इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था।

वहीं अब नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर नजर रहेगी। इससे साफ होगा कि एथेनॉल की सप्लाई और उसके आवंटन से जुड़े विवाद पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है