

High-Mileage Car India: महंगे पेट्रोल से परेशान लोगों के लिए अब राहत की बड़ी खबर सामने आई है। चीनी ऑटो कंपनी Geely Auto ने एक ऐसा हाइब्रिड सिस्टम पेश किया है, जो कार चलाने का पूरा खेल बदल सकता है। कंपनी का दावा है कि उसका नया "i-HEV Intelligent Hybrid सिस्टम" सिर्फ 1 लीटर पेट्रोल में करीब 45 किलोमीटर तक कार चला सकता है। यह आंकड़ा इसलिए खास है क्योंकि अब तक इस सेगमेंट पर जापानी कंपनियों, खासकर Toyota का दबदबा रहा है।
Geely ने इस नई टेक्नोलॉजी को अपने Emgrand मॉडल में टेस्ट किया, जहां कार ने 100 किलोमीटर चलने में सिर्फ 2.22 लीटर पेट्रोल खर्च किया। यानी लगभग 45 km/l का माइलेज, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। कंपनी के मुताबिक, इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। अगर भारतीय हालात में देखें, तो इस माइलेज के साथ दिल्ली से मुंबई तक का सफर करीब ₹3000 में पूरा किया जा सकता है। पेट्रोल के बढ़ते दामों के बीच यह टेक्नोलॉजी आम आदमी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
Geely का i-HEV सिस्टम सिर्फ माइलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एडवांस AI तकनीक भी दी गई है। यह स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम रियल टाइम में तापमान, नमी और ऊंचाई जैसी चीजों को समझकर ईंधन का बेहतर इस्तेमाल करता है। इसका फायदा यह है कि कार हर तरह के मौसम और सड़क की स्थिति में बेहतरीन परफॉर्मेंस देती है। साथ ही, इसमें इतना पावरफुल कंप्यूटिंग सिस्टम है कि यह एडवांस ड्राइविंग फीचर्स को भी सपोर्ट करता है, जो कई मौजूदा हाइब्रिड कारों में नहीं मिलते।
Geely इस नई टेक्नोलॉजी को 2026 तक अपने कई मॉडल्स में लाने की तैयारी कर रही है। इनमें Preface, Monjaro, Starray और Emgrand जैसे मॉडल शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि यह किफायती और स्मार्ट टेक्नोलॉजी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।
ऑटो इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स मानते हैं कि Geely का यह कदम बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। Shanghai की Automotive Foresight के मैनेजिंग डायरेक्टर Yale Zhang के अनुसार, यह सिस्टम ज्यादा पावरफुल मोटर, कम फ्यूल खपत और एडवांस फीचर्स के साथ आता है, जो जापानी कंपनियों को कड़ी चुनौती देता है।
हाइब्रिड कारों की दुनिया में जापान का वर्चस्व 1997 से बना हुआ है, जब Toyota Prius लॉन्च हुई थी। इसके बाद से Toyota और अन्य जापानी कंपनियों ने इस सेगमेंट पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। खासकर उन देशों में जहां इलेक्ट्रिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, वहां हाइब्रिड कारें ज्यादा पसंद की जाती हैं। वहीं, चीन अब तक इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड पर फोकस कर रहा था, लेकिन Geely का यह कदम पारंपरिक हाइब्रिड बाजार में उसकी मजबूत एंट्री दिखाता है।