

Volkswagen 1 Lakh Job Cuts: Volkswagen Group ने ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री के सबसे बड़े पुनर्गठन अभियानों में से एक को मंजूरी दे दी है। बता दें कि कंपनी मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच इस दशक के आखिर तक दुनिया भर में करीब 1 लाख नौकरियां कम करने पर सहमति बनी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है और चीनी कार कंपनियों से प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
Volkswagen Group के बारे में बताए तो इसमें करीब 50,000 नौकरियां कम करने की योजना को मंजूरी दी गई है जबकि इतनी ही नौकरियों में कटौती पर पहले से सहमति बन चुकी थी। जिसकी सीधा मतलब है कि कुल संख्या करीब 1 लाख तक पहुंच जाएगी। वहीं कंपनी ने बताया है कि आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप वर्कफोर्स को व्यवस्थित करना जरूरी है। ग्रुप में Volkswagen के अलावा Audi और Porsche जैसे बड़े ब्रांड भी शामिल हैं। वहीं अमेरिका के टैरिफ, यूरोप की ऊंची ऑपरेशनल लागत, ओवरकैपेसिटी और चीन से मिल रही चुनौती ने कंपनी पर दबाव बढ़ाया है। कुल कटौती कंपनी की वैश्विक वर्कफोर्स के करीब 15 फीसदी के बराबर बताई जा रही है।
जानकारी के लिए बता दें कि पुनर्गठन योजना का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। जिसको लेकर कंपनी ने कहा है कि जर्मनी के हनोवर, एमडेन, ज़्विकौ और नेकरसल्म प्लांट के लंबे समय के भविष्य की गारंटी नहीं दी जा सकती। इन फैक्ट्रियों के वैकल्पिक इस्तेमाल के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। ऐसे में अगर इनमें से कोई प्लांट बंद होता है तो Volkswagen के इतिहास में यह बड़ा बदलाव होगा क्योंकि कंपनी ने अपने घरेलू बाजार में पूरी तरह ऑपरेशनल फैक्ट्री बंद नहीं की है। इन प्लांट्स से जुड़े हजारों सप्लायर और स्थानीय रोजगार भी प्रभावित हो सकते हैं।
Volkswagen के CEO ओलिवर ब्लूम ने कहा कि सुपरवाइजरी बोर्ड ने एग्जीक्यूटिव बोर्ड की भविष्य की योजना को सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। हालांकि इससे पहले मैनेजमेंट और यूनियन के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। IG Metall यूनियन ने मैनेजमेंट की कुछ योजनाओं को लेकर तीखी आपत्ति जताई थी। वहीं कंपनी ने सुपरवाइजरी बोर्ड की शक्तियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में बदलाव की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। Volkswagen की सुपरवाइजरी बोर्ड में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों की मजबूत भूमिका है जिससे प्लांट बंद करने जैसे फैसले बेहद संवेदनशील बन जाते हैं।
IG Metall यूनियन और Volkswagen सुपरवाइजरी बोर्ड की सदस्य क्रिस्टियान बेनर और डेनिएला कैवलो ने संयुक्त बयान में कहा, "हमने किसी भी प्लांट को छोड़ने का फैसला नहीं किया है और मीडिया रिपोर्टों के विपरीत, किसी भी प्लांट को बंद करने की मंजूरी नहीं दी गई है।"
जिसका सीधा मतलब है कि अभी के लिए कंपनी ने बड़े पैमाने पर नौकरियां घटाने की योजना जरूर आगे बढ़ाई है लेकिन जर्मनी के प्लांट्स को बंद करने पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले सालों में EV बाजार की मांग और चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा Volkswagen की अगली रणनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।