

नई दिल्ली. आज जहां असम-मेघालय सीमा विवाद (Assam-Meghalaya Border Row) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय HC के फैसले को अब पूरी तरह से पलट दिया है। पता हो कि HC ने मुख्यमंत्रियों द्वारा तय MOU पर अपनी तरफ से रोक लगा दी थी। लेकिन अब SC ने इसे हटा दिया है।
MOU को किसने दी चुनौती
गौरतलब है कि आज सुनवाई के दौरान CJI ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि हाईकोर्ट में MOU को किसने चुनौती दी थी। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कुछ नागरिकों ने, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।दरअसल, असम-मेघालय सीमा विवाद पर HC ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (MOU) पर स्टे लगा दिया था,जो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीमा विवाद को खत्म करने के लिए हस्ताक्षर किए गए थे।
SG तुषार मेहता की दलील
इसके पहले सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि HC की एक सिंगल और डिविजनल बेंच ने इस साल के शुरुआत में साइन किए गए इंटर-स्टेट बॉर्डर पैक्ट के ऑपरेशन पर ऐसे ही स्टे लगा दिया है। इसपर देश के मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि, इस मामले की सुनवाई हम करेंगे और हमें याचिका की सभी प्रतियां भी उपलब्ध कराई जाएं।
क्या है मामला
जानकारी दें कि, मेघालय HC की सिंगल जज बेंच ने 9 दिसंबर को इंटर-स्टेट बॉर्डर पैक्ट के संबंध में सीमा चौकियों के निर्माण पर अंतरिम स्टे लगाया था। लेकिन इसके बाद HC की डिविजन बेंच ने ही उपरोक्त आदेश पर रोक लगाने से भी साफ़ इनकार कर दिया था। जिसके चलते दोनों सरकारों को ही हारकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा ।
क्या कहता है MOU
बता दें कि, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड़ के। संघमा और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बीते मार्च 2022 में एक MOU पर हस्ताक्षर किए थे। जिसके तहत तहत सीमा के उन 12 स्थानों में से कम से कम 6 का सीमांकन करने पर सहमती जताई गई थी जिन पर दो राज्यों के बीच सबसे अधिक संघर्ष की स्थिति बनती है। जान लें कि, असम और मेघालय के बीच का यह सीमा विवाद लगभग पिछले 50 सालों से चला आ रहा है। जिसे सुलझाने की कोशिशों के चलते ही हालिया दिनों में यहां शांति का माहौल है।