रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सोर्स-सोशल ) 
विदेश

Putin-Jinping की चीन में हुई मीटिंग, दोनों दिग्गजों के बीच क्या हुई बात? जानिए मुख्य बातें

Putin-Jinping Meeting: बीजिंग में पुतिन और शी जिनपिंग की अहम मुलाकात हुई। पश्चिमी दबाव से निपटने के लिए ऊर्जा व व्यापार पर कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। यह दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी खबर है।

प्रिया सिंह

Global Leaders Putin-Jinping Meeting: बीजिंग के विशाल ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल्स में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय ऐतिहासिक वार्ता संपन्न हुई है। दोनों दिग्गज नेताओं ने वैश्विक राजनीति में पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव और उथल-पुथल से मजबूती से निपटने के लिए आपसी एकता और मजबूत रणनीतिक समन्वय पर अपने विचार जाहिर किये हैं।

इस विशेष कूटनीतिक मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, कूटनीति और आधुनिक प्रौद्योगिकी से संबंधित कई महत्वपूर्ण समझौतों की आधिकारिक घोषणा की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हालिया चीन यात्रा के ठीक कुछ दिनों बाद आयोजित हुए इस बड़े शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें पूरी तरह से टिकी हुई थीं।

इस खास और महत्वपूर्ण कूटनीतिक चर्चा से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि रूस और चीन अपनी आपसी दोस्ती को एक नई और मजबूत ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं। वैश्विक अस्थिरता के इस चुनौतीपूर्ण दौर में दोनों देशों का एक साथ आना अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक बहुत ही बड़ा और सीधा कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।

व्यापार और ऊर्जा से लेकर आधुनिक तकनीक तक के हर एक क्षेत्र में दोनों देश अब एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। इन तमाम नए समझौतों से आने वाले समय में विश्व की बहुध्रुवीय व्यवस्था और ज्यादा मजबूत होगी तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया आर्थिक समीकरण देखने को मिलेगा।

रूस और चीन के बीच मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि

रूस और चीन के बीच संपन्न हुई इस सफल और बड़ी वार्ता में सबसे अहम फैसला 25 वर्ष पूर्व हस्ताक्षरित 'चीन-रूस सद्भावना और मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि' का बड़ा विस्तार करना था। इस खास कदम से दोनों शक्तिशाली देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को भविष्य के लिए काफी ज्यादा बल और नई दिशा मिलेगी। शी जिनपिंग ने साफ कहा कि दोनों देशों को मिलकर एकतरफा दादागिरी का सख्त विरोध करना चाहिए और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की रक्षा करनी चाहिए।

रूस और चीन के बीच हालांकि किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई लेकिन दोनों पक्षों ने ऊर्जा सहयोग के विस्तार पर अपनी ठोस प्रगति की पुष्टि की है। विशेष रूप से लंबे समय से चर्चित और बेहद अहम 'पावर ऑफ साइबेरिया 2' गैस पाइपलाइन के संबंध में दोनों देशों के बीच काफी सकारात्मक बातचीत हुई है। यह प्रस्तावित पाइपलाइन मंगोलिया के रास्ते चीन को प्रतिवर्ष 50 अरब घन मीटर तक भारी रूसी प्राकृतिक गैस पहुंचाएगी जो ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा कदम है।

पश्चिमी नीतियों की निंदा

व्लादिमीर पुतिन ने वर्तमान की वैश्विक अस्थिरता के दौरान रूस को एक बहुत ही मजबूत और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बताया और शी जिनपिंग ने भी निरंतर आपसी सहयोग पर जोर दिया। कड़े शब्दों वाले अपने एक नए संयुक्त बयान में बीजिंग और मॉस्को ने अमेरिका द्वारा किए गए कई सैन्य हस्तक्षेपों और दबाव अभियानों की कड़ी आलोचना की। वाशिंगटन का नाम लिए बिना दोनों देशों ने किसी भी तरह के सैन्य दुस्साहस और वैश्विक शिपिंग तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में हस्तक्षेप की खुले तौर पर निंदा की है।

हालिया शिखर सम्मेलन में प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक अनुसंधान, बौद्धिक संपदा और बड़े औद्योगिक मजबूत सहयोग से संबंधित कई बड़े और नए समझौते सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इन अहम समझौतों से साफ संकेत मिलता है कि बीजिंग और मॉस्को पश्चिमी प्रौद्योगिकी और वित्तीय प्रणालियों पर अपनी निर्भरता बहुत कम करने का कड़ा प्रयास कर रहे हैं। शी जिनपिंग ने ईरान संघर्ष पर एक नए युद्धविराम को अत्यंत आवश्यक बताते हुए चीन को एक वैश्विक मध्यस्थ के रूप में मजबूती से स्थापित किया है।

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