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खामेनेई के बाद कौन... क्या ईरान बनेगा दूसरा इराक या सीरिया? जानिए क्यों सत्ता परिवर्तन के नाम से डर रहा है US

US Iran Tension: अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए, उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया और सीधी सैन्य धमकी दी, लेकिन खामेनेई का शासन अब भी अडिग है। जानें इसके पीछे के जटिल भू-राजनीतिक कारण।

अमन उपाध्याय

Donald Trump Iran Attack: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप की सीधी धमकियों और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान घुटने टेकने को तैयार नहीं है। पेंटागन के युद्धपोत तैयार हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को 'मारना' आसान है, पर उसे 'झुकाना' लगभग नामुमकिन है।

खामेनेई तक पहुंचना क्यों आसान नहीं है?

अमेरिका के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई तक पहुंचना आसान नहीं है। वे इस समय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की अभेद्य सुरक्षा में छिपे हुए हैं। अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अगर हमला कर खामेनेई को हटा भी दिया जाए तो ईरान को कौन संभालेगा? ट्रंप प्रशासन यह मान चुका है कि निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के पास ईरान में पर्याप्त जमीनी समर्थन नहीं है। सत्ता में खालीपन आने पर ईरान, इराक या अफगानिस्तान जैसी अराजकता में डूब सकता है जो अमेरिका के लिए एक बड़ा जोखिम है।

क्या है मिडिल ईस्ट का भूगोल?

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 40 हजार से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं लेकिन वह चाहकर भी सीधा हमला नहीं कर पा रहा है। सऊदी अरब जैसे मित्र देश अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं कि वह हमला न करे क्योंकि युद्ध की स्थिति में खाड़ी देशों पर सीधा खतरा आएगा। कतर और ओमान जैसे देश लगातार मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हाल ही में नेतन्याहू और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से बात कर तनाव कम करने की कोशिश की है।

ईरान कैसे कर सकता है अमेरिका पर पलटवार?

ईरान ने दो टूक शब्दों में चेताया है कि उस पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो उसका जवाब तुरंत और बेहद सख्त होगा। भले ही सैन्य क्षमता के मामले में ईरान अमेरिका से पीछे हो लेकिन उसके पास ऐसे हथियार हैं जो वैश्विक स्तर पर बड़ा असर डाल सकते हैं। ईरान के पास करीब 2,000 किलोमीटर तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनकी जद में इराक, सीरिया और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने आते हैं।

इसके अलावा ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की क्षमता भी रखता है। यह वही अहम समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन होता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। सिर्फ यही नहीं ईरान अपने सहयोगी प्रॉक्सी गुटों जैसे हूती और विभिन्न शिया मिलिशियाओं के जरिए भी अमेरिका और उसके साझेदार देशों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

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