US Navy Warships Food Shortage Middle East: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थितियां बनी हुई हैं। जहां एक तरफ वाशिंगटन अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है वहीं, दूसरी तरफ उसके शक्तिशाली युद्धपोतों के भीतर से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तैनात अमेरिकी सैनिकों के परिवारों ने दावा किया है कि दुनिया की सबसे आधुनिक सेना के जवान अब बुनियादी जरूरतों, विशेषकर भोजन की कमी से जूझ रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन और USS Tripoli जैसे विशाल और आधुनिक युद्धपोतों पर तैनात सैनिकों को न केवल सीमित, बल्कि बेहद घटिया गुणवत्ता का खाना दिया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों और USA टुडे की रिपोर्ट ने इस मामले में बवाल मचा दिया है। इन तस्वीरों में सैनिकों की प्लेटों पर केवल थोड़ा सा मांस, एक टॉर्टिला या कुछ उबली हुई सब्जियां ही नजर आ रही हैं।
सैनिकों के परिवारों का कहना है कि जवान लगातार भूखे रहने को मजबूर हैं। USS त्रिपोली पर तैनात एक सैनिक के पिता ने चिंता जताते हुए कहा कि जिस सेना को दुनिया की सबसे ताकतवर सेना माना जाता है, अगर वह अपने सैनिकों को ताजा और पर्याप्त खाना भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है, तो यह बेहद गंभीर और शर्मनाक स्थिति है।
सैनिकों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। परिवारों ने बताया कि वे अपने बच्चों के लिए भोजन, कपड़े और जरूरी सामान भेज रहे हैं, लेकिन वे भी उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हवाई क्षेत्र (Airspace) पर लगी पाबंदियों के कारण अमेरिकी डाक सेवा (USPS) ने 27 सैन्य पिनकोड पर डिलीवरी अस्थायी रूप से रोक दी है। एक मां ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि उसने अपने बेटे के लिए लगभग 2000 डॉलर का जरूरी सामान भेजा था, लेकिन वह अब तक जहाज तक नहीं पहुँचा है। कुछ समुदायों और चर्च से जुड़े लोगों ने भी शिकायत की है कि सैनिकों को भोजन स्वादिष्ट नहीं लग रहा और वे हमेशा भूखे महसूस करते हैं। हाइजीन प्रोडक्ट्स और कपड़ों की कमी ने भी सैनिकों के दैनिक जीवन को कठिन बना दिया है।
अमेरिकी सेना ने स्वीकार किया है कि यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है लेकिन उनका दावा है कि यह एक 'अस्थायी' समस्या है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही क्षेत्र में हवाई मार्ग फिर से खुलेंगे सप्लाई को सामान्य कर दिया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रसद (Logistics) संबंधी कमियां सैनिकों के मनोबल को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।
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एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने के लिए मिडिल ईस्ट में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ उसके अपने ही सैनिक बुनियादी राशन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह विरोधाभास अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े करता है।