होर्मुज में सुरक्षा देने से पीछे हटी अमेरिका, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

होर्मुज पर पलटा अमेरिका? ईरान युद्ध के बीच ट्रंप के वादे से पीछे हटी US सेना, शिपिंग कंपनियों की टेंशन बढ़ी

Us Israel Iran War: अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्वीकार किया है कि अमेरिकी सेना फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए तैयार नहीं है।

अमन उपाध्याय

Us Iran War Strait Of Hormuz Tanker Security: ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इस बीच, अमेरिकी प्रशासन की ओर से एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है।

अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करने या सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार नहीं है। यह कबूलनामा ऐसे समय में आया है जब समुद्री व्यापार मार्गों पर हमलों का खतरा चरम पर है।

अमेरिकी सैन्य संसाधनों का बदला हुआ फोकस

क्रिस राइट ने सीएनबीसी (CNBC) के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि वर्तमान में अमेरिका के सैन्य संसाधन पूरी तरह से ईरान की आक्रामक क्षमताओं और उसके सैन्य ढांचे को निशाना बनाने पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि टैंकरों को सुरक्षा देने की व्यवस्था भविष्य में शुरू हो सकती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में अमेरिकी नौसेना इसके लिए उपलब्ध नहीं है। राइट ने संकेत दिया है कि महीने के अंत तक अमेरिकी नौसेना द्वारा टैंकरों को सुरक्षा देने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना बन सकती है, लेकिन फिलहाल शिपिंग कंपनियों को अपनी सुरक्षा स्वयं सुनिश्चित करनी होगी।

डोनाल्ड ट्रंप का वादा और मौजूदा विरोधाभास

ऊर्जा सचिव का यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले आश्वासनों के विपरीत नजर आता है। कुछ समय पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि यदि जरूरत पड़ी, तो मध्य पूर्व में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नौसेना तैनात की जाएगी। ट्रंप ने यह भी भरोसा दिलाया था कि ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए जहाजरानी कंपनियों को 'उचित कीमत' पर जोखिम बीमा उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वैश्विक बाजार में तेल और गैस का प्रवाह बाधित न हो। हालांकि, ऊर्जा सचिव के नए बयान ने शिपिंग उद्योग के भीतर अनिश्चितता पैदा कर दी है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच स्थित एक संकीर्ण लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से होकर गुजरती है। मौजूदा संघर्ष के कारण इस रास्ते पर कई तेल टैंकर फंसे हुए हैं और समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गया है। अमेरिका का यह स्वीकार करना कि वह वर्तमान में सुरक्षा नहीं दे सकता, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को अस्थिर कर सकता है।

तेल की कीमतों पर क्रिस राइट का विश्लेषण

ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतें 200 प्रति बैरल डॉलर तक पहुंच सकती हैं। हालांकि, क्रिस राइट ने इस संभावना को कम बताया है। उन्होंने सीएनएन से बातचीत में कहा कि मौजूदा सैन्य अभियानों और संकट के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने के बावजूद वैश्विक तेल कीमतों के 200 डॉलर के स्तर तक पहुंचने के आसार कम हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें महीने के अंत पर टिकी हैं जब अमेरिका अपनी नौसेना को टैंकरों की सुरक्षा के लिए तैनात करने पर विचार कर सकता है।

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