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टूटने की कगार पर अधूरे सीजफायर! लेबनान से होर्मुज तक गूंज रही युद्ध की आहट, दोनों ओर से लोड हो रहे हथियार

Us Iran Israel War: मिडिल ईस्ट के दो मोर्चों पर तनाव गहरा गया है। अमेरिका ने 10,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, वहीं ईरान और हिज्बुल्लाह ने भी युद्ध की तैयारी तेज कर दी है। जानिए क्या है पूरा मामला।

अमन उपाध्याय

Us Iran Israel War Strategy: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है। दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान अत्यधिक तनाव की स्थिति में हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और लेबनान के साथ हुए सीजफायर के समझौते अधूरे साबित हो रहे हैं और दोनों ही पक्ष अब पीछे हटने के बजाय अपने हथियारों को लोड करने में जुटे हैं।

अमेरिका की बड़ी सैन्य तैनाती

क्षेत्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका ने अचानक मिडिल ईस्ट में 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर दी है। इन सैनिकों में मुख्य रूप से नौसेना और वायु सेना के जवान शामिल हैं जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान के रणनीतिक ठिकानों पर तैनात किया जा रहा है। वाशिंगटन का कहना है कि यह कदम सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है लेकिन ईरान इसे अमेरिका की कमजोरी और हार का संकेत बता रहा है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिका सीधे युद्ध की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है और केवल दिखावे के लिए सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है।

तेल सप्लाई पर खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग है, जहां से रोजाना करोड़ों बैरल तेल का निर्यात होता है। वर्तमान में यहाँ ईरानी जहाजों की सक्रियता बढ़ गई है और अमेरिकी नौसेना भी हाई अलर्ट मोड पर है। ईरान पहले भी कई बार इस रास्ते को बंद करने की धमकी दे चुका है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है।

इजरायल ईरान युद्ध विश्लेषण

लेबनान में हिज्बुल्लाह और इजरायल की जिद

दूसरी तरफ, लेबनान में भी स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का स्पष्ट रुख है कि जब तक हिज्बुल्लाह पूरी तरह कमजोर नहीं हो जाता, इजरायल शांत नहीं बैठेगा। वहीं, हिज्बुल्लाह ने भी साफ कर दिया है कि जब तक इजरायली सेना लेबनान की जमीन से पूरी तरह पीछे नहीं हटती तब तक वह अपने हथियार नहीं डालेगा। दोनों पक्षों के बीच मिसाइलों और गोला-बारूद का जमावड़ा लगातार बढ़ रहा है, जिससे किसी भी समय बड़ा संघर्ष शुरू होने की आशंका है।

क्या है भविष्य की रणनीति?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सैन्य दबाव के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाना चाहता है, जबकि ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन शक्ति का प्रदर्शन कर अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हालांकि दोनों ही देश जानते हैं कि एक पूर्ण युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए विनाशकारी होगा लेकिन फिलहाल दोनों ओर से कूटनीति के बजाय सैन्य तैयारियों पर अधिक जोर दिया जा रहा है।

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