Highlights:
यूएस फेडरल जज ने अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले को पलटा
कुछ मीडिया संस्थान की व्हाइट हाउस में एंट्री पर बैन का फैसला रद्द किया
प्रेस पास रद्द करने के फैसले को संवैधानिक अधिकार का हनन बताया
CNN, MSNBC और Politico के पत्रकारों पर ट्रंप ने एक्शन लिया था
US Jounalist White House Entry: अमेरिका में कुछ मीडिया आउटलेट के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में बैन को लेकर वहां केएक फेडरल जज ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर रोक लगा दी। दरअसल कुछ समय पहले CNN, MSNBC और Politico के पत्रकारों को व्हाइट हाउस में आने से रोका जा रहा था।
जज ने कहा कि प्रशासन का उनके प्रेस पास रद्द करने का फैसला शायद उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन था। ट्रंप द्वारा नियुक्त अमेरिकी जिला जज टिमोथी केली ने एक शुरुआती आदेश जारी किया, जिससे इन तीनों न्यूज मीडिया संस्थान के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में आने की इजाजत मिल गई।
जज ने अपने 26 पन्नों के फैसले में पाया कि पत्रकारों के 'हार्ड पास' रद्द करने से शायद अमेरिकी संविधान के पहले और पांचवें संशोधन के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
इस फैसले ने जज की उस पुरानी कानूनी सोच को और मजबूत किया कि ट्रंप प्रशासन का कदम शायद बदले की भावना से उठाया गया था और इसने प्रेस के लिए संवैधानिक सुरक्षा का उल्लंघन किया। राष्ट्रपति के फैसले पर अपनी राय बताते हुए, केली ने लिखा कि ऐसा लगता है कि इन मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्टिंग पर ट्रंप की आपत्तियों की वजह से ही ये पाबंदियां लगाई गईं।
जज केली ने फैसले में लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शायद इसलिए शिकायतकर्ताओं को व्हाइट हाउस से बैन किया क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी रिपोर्टिंग आम तौर पर गलत और उनके खिलाफ पक्षपाती होती है। जज ने जस्टिस डिपार्टमेंट की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि पत्रकारों के क्रेडेंशियल वापस लेने का फैसला कम से कम कुछ हद तक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं की वजह से लिया गया था।
फैसले में कहा गया कि पहली बात तो यह है कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुरू से ही राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर शिकायतकर्ताओं के हार्ड पास रद्द करने का फैसला किया था, और न ही उन्होंने कभी सीधे तौर पर यह कहा कि उनके फ़ैसले की वजह राष्ट्रीय सुरक्षा थी।
दरअसल, बैन को लेकर CNN, MS NOW और Politico ने ट्रंप के फैसले को कानूनी चुनौती दी। न्यूज संगठनों ने दलील दी कि यह फैसला राष्ट्रपति के बारे में उनकी कवरेज के बदले में लिया गया कदम था और इसलिए इसने बोलने और प्रेस की आजादी के लिए 'फर्स्ट अमेंडमेंट' के तहत मिली सुरक्षा का उल्लंघन किया। इन आउटलेट्स ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके संविधान के पांचवें संशोधन के तहत मिलने वाले अधिकारों का उल्लंघन किया है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के उनके प्रेस क्रेडेंशियल रद्द कर दिए।
जज के फैसले के बाद एक फिर इन मीडिया संस्थान के पत्रकार को व्हाइट हाउस में एंट्री मिल जाएगी।