अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)  
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US Birthright: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप का फैसला पलटा, अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को राहत

US Birthright Rules: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता (US Birthright) को बरकरार रखा है। 6-3 के फैसले से ट्रंप का आदेश खारिज हुआ, जिससे अब भारतीयों को भारी राहत मिली है।

प्रिया सिंह

US Birthright Supreme Court Decision: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर नागरिकता को बरकरार रखने फैसले के बाद अमेरिका में अस्थायी वीजा पर रह रहे हजारों भारतीय परिवारों ने बड़ी राहत की सांस ली है। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े कार्यकारी आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें वे नागरिकता रोकना चाहते थे।

ट्रंप प्रशासन का कहना था कि अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने वालों के पैदा होने वाले बच्चों को देश की नागरिकता बिल्कुल नहीं मिलेगी। लेकिन देश की शीर्ष अदालत ने इस आदेश को अवैध बताकर 150 साल से भी ज्यादा पुरानी संवैधानिक सुरक्षा और वादे को फिर से बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 6-3 के अहम फैसले में साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह आदेश 14वें संविधान संशोधन के नियमों का सीधा उल्लंघन करता है। इस ऐतिहासिक फैसले ने यह पक्का कर दिया है कि अमेरिका में पैदा होने वाले सभी बच्चों को अपने आप वहां की नागरिकता मिलती रहेगी।

चाहे उन बच्चों के माता-पिता अस्थायी वीजा पर हों या स्टूडेंट वीजा पर, उन्हें जन्म के आधार पर नागरिकता का अधिकार हमेशा मिलेगा। यह बड़ा फैसला ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों के लिए एक बहुत ही शानदार खबर लेकर आया है।

भारतीयों को राहत

यह फैसला H-1B वर्क वीजा, L-1 इंट्रा कंपनी ट्रांसफर वीजा और दूसरे अस्थायी इमिग्रेशन श्रेणी वाले भारतीयों के लिए बहुत ही ज्यादा अहम है। अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए हर साल देश के हिसाब से एक तय सीमा है जिससे कई भारतीयों को दशकों तक इंतजार करना पड़ता है। इस लंबे समय के दौरान भारतीय प्रोफेशनल्स अपने परिवार और बच्चों के साथ अस्थायी वीजा पर ही अमेरिका में अपना गुजारा करते हैं। अब इस नए फैसले से अमेरिका में पैदा होने वाले उनके बच्चों को पीढ़ियों से चली आ रही नागरिकता बिना किसी परेशानी के मिल सकेगी।

ऐतिहासिक फैसला

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत वाले फैसले में ट्रंप प्रशासन की दलील को खारिज करते हुए 1898 के ऐतिहासिक कानूनों का अहम हवाला दिया। कोर्ट ने अमेरिका बनाम वोंग किम आर्क मामले में दिए गए 1898 के ऐतिहासिक फैसले को एकदम सही ठहराया और उसी को मुख्य आधार माना।

इस पुराने फैसले ने तय किया था कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले हर व्यक्ति को अमेरिका की नागरिकता पाने का पूरा अधिकार है। सिर्फ विदेशी राजनयिकों या कब्जा करने वाली दुश्मन सेनाओं के बच्चों को ही इस खास जन्मजात नागरिकता के अधिकार से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

ट्रंप को झटका

इस अहम फैसले ने हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों के चलते पैदा हुई एक बड़ी अनिश्चितता को खत्म कर दिया है। अमेरिका के टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंस सेक्टर के कुल वर्कफोर्स में भारतीय प्रोफेशनल्स बहुत ही बड़ा और अहम हिस्सा हैं।

H-1B वीजा धारकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो सालों तक ग्रीन कार्ड की लंबी प्रक्रिया में कानूनी अनिश्चितता में हमेशा फंसे रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह नया आदेश ऐसे सभी परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है जो भविष्य को लेकर काफी ज्यादा परेशान थे।

वीज़ा धारक

भारतीय नागरिक लंबे समय से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास में अपना बहुत ही शानदार और अतुलनीय योगदान लगातार पूरी ईमानदारी से दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नागरिकता पाने के लिए कई तरह की जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और लंबे समय तक चलने वाले इंतजार का भारी सामना करना पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने 150 साल पहले 14वें संविधान संशोधन के उस अहम वादे का जिक्र किया और कहा कि अदालत आज भी उस वादे को निभा रही है। जन्म के आधार पर नागरिकता सुरक्षित रहने से अब इन परिवारों को अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है।

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