Trump Military Action Iran: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव अब अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी भी समय सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। इसी बीच भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ी एडवाइजरी जारी की है। यह बढ़ता तनाव पूरी दुनिया को एक संभावित और विनाशकारी युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर चुका है।
ईरान में हजारों लोगों के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से फारसी भाषा में रहस्यमयी मैसेज आ रहे हैं। इन संदेशों में सिर्फ 'Wait and See' लिखा है जिसका अर्थ है कि बस इंतजार करें और देखें। इन संदेशों के बाद से पूरे ईरान में डर का माहौल बना हुआ है और लोग बड़ी अनहोनी की आशंका जता रहे हैं।
ईरान में बढ़ते विस्फोटक हालात को देखते हुए भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीयों के लिए निर्देश जारी किए हैं। भारत सरकार ने अपने नागरिकों को सुरक्षा का हवाला देते हुए जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सख्त सलाह दी है। अधिकारियों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है इसलिए वे वापस आ जाएं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का तख्तापलट देखना चाहते हैं। इसके लिए अमेरिका ने ब्रिटेन और मिडिल ईस्ट के अपने सैन्य अड्डों पर घातक फाइटर जेट्स की तैनाती बढ़ा दी है। एफ-22 और एफ-35 जैसे विमानों के साथ अमेरिकी नौसेना के बड़े युद्धपोत भी अब ईरान की तरफ बढ़ रहे हैं।
युद्ध के खतरे के बीच ईरान के पांच बड़े विश्वविद्यालयों में छात्रों ने खामेनेई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी छात्र अब ईरान में सत्ता परिवर्तन और खामेनेई के शासन के अंत की मांग कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार खामेनेई ने अमेरिकी हमले के डर से अपना उत्तराधिकारी भी चुन लिया है ताकि सत्ता बनी रहे।
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप कभी भी 'ऑपरेशन तेहरान' को हरी झंडी दिखाकर बड़ा हमला कर सकते हैं। अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु केंद्रों और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अगर यह हमला होता है तो यह पिछले साल के ऑपरेशन मिडनाइट हैमर से भी ज्यादा बड़ा और घातक होगा।
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ईरान भी अमेरिका की इस चुनौती से निपटने के लिए अपनी सेना को युद्ध के रिहर्सल में लगा चुका है। खामेनेई की सेना ने चेतावनी दी है कि हमला होने पर वे इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर जोरदार पलटवार करेंगे। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि कूटनीतिक बातचीत के सारे रास्ते अब लगभग बंद हो गए हैं।