अल-नीनो ने दी दस्तक, फोटो- AI 
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अल-नीनो की दस्तक से बढ़ी टेंशन, कैसे भारत में घट सकता है बिजली उत्पादन? समझिए बड़ा खतरा

El Nino Arrived: अमेरिकी संस्था NOAA ने अल-नीनो के आने की पुष्टि कर दी है। इससे भारत में कमजोर मानसून, बिजली उत्पादन में 10% गिरावट और साल 2027 में वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड टूटने की आशंका है।

अमन उपाध्याय

El Nino Arrived India Impact:  दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों की चिंताओं को सच साबित करते हुए 'अल-नीनो' ने आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है। अमेरिकी एजेंसी 'नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन' (NOAA) ने घोषणा की है कि प्रशांत महासागर में एक बड़े हिस्से का तापमान 0.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है, जो अल-नीनो की शुरुआत का स्पष्ट संकेत है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह इस सदी का सबसे शक्तिशाली अल-नीनो हो सकता है, जिसे 'सुपर अल-नीनो' का नाम दिया जा रहा है।

अल-नीनो का भारत पर क्या होगा असर?

भारत के लिए यह खबर विशेष रूप से चिंताजनक है। मौसम विभाग (IMD) और विशेषज्ञों के अनुसार, अल-नीनो के कारण इस साल मानसून कमजोर रह सकता है, जिससे बारिश औसत से 10 फीसदी कम होने की आशंका है। इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र, खासकर धान की फसल पर पड़ेगा। खेती के साथ-साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। कम बारिश के कारण जलाशयों में पानी का स्तर गिरेगा, जिससे जल विद्युत उत्पादन में 10 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशयों में पानी कम होने से टरबाइन को कम ताकत मिलेगी, जो बिजली निर्माण को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

इतिहास का सबसे गर्म साल होने की आशंका

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा अल-नीनो पहले से जारी ग्लोबल वार्मिंग के असर को और घातक बना देगा। इसके प्रभाव से साल 2027 में वैश्विक तापमान के सभी पिछले रिकॉर्ड टूटने की प्रबल संभावना है। NOAA के अनुसार, नवंबर से जनवरी के बीच एक 'अति शक्तिशाली' अल-नीनो की 63% संभावना है, जो 1950 के बाद की सबसे बड़ी मौसम घटनाओं में से एक हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर मौसम का उथल-पुथल

अल-नीनो केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र को बिगाड़ सकता है। इसके कारण ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भीषण सूखा पड़ सकता है और जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

वहीं दूसरी ओर, पेरू और इक्वाडोर जैसे देशों में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आने की आशंका है। मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का गर्म होना वातावरण में ऐसे बदलाव लाता है जो सूखे और बाढ़ जैसी चरम स्थितियों को जन्म देते हैं।

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