Sunita Williams 61th Birthday: सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की उन अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में कई अहम उपलब्धियां अपने नाम की हैं। NASA के साथ अपने करियर में वह अब तक तीन अंतरिक्ष अभियानों का हिस्सा बन चुकी हैं और कुल 608 दिन अंतरिक्ष में गुजार चुकी हैं। उनका सफर भारतीय पारिवारिक विरासत, अमेरिकी नौसेना के अनुभव और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति समर्पण से जुड़ा हुआ है।
19 सितंबर 1965 को जन्मीं सुनीता विलियम्स के जन्मदिन से जुड़ी एक खास बात यह है कि वह दो बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS पर अपना जन्मदिन मना चुकी हैं। उन्होंने पहली बार 19 सितंबर 2012 को ISS पर अपना 47वां जन्मदिन मनाया था। उस समय वह Expedition 33 की कमांडर थीं। NASA के अनुसार, उन्होंने इस खास दिन को अपने क्रू साथियों के साथ अलग अंदाज में सेलिब्रेट किया था।
इसके करीब 12 साल बाद 19 सितंबर 2024 को सुनीता ने दूसरी बार अंतरिक्ष में अपना जन्मदिन मनाया। उस समय वह बोइंग स्टारलाइनर मिशन के तहत ISS पर मौजूद थीं। यह मिशन करीब आठ दिनों के लिए निर्धारित था, लेकिन स्टारलाइनर में आई तकनीकी दिक्कतों के चलते उनकी वापसी कई महीनों के लिए टल गई। आखिरकार मार्च 2025 में वह धरती पर वापस लौटीं।
सुनीता लिन विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को ओहायो, अमेरिका में हुआ था। उनके पिता डॉ. दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले के झुलासन गांव से मूल रूप से जुड़े थे। वहीं उनकी मां बोनी पंड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं।
इस तरह सुनीता के पारिवारिक इतिहास में भारतीय और अमेरिकी, दोनों संस्कृतियों की झलक देखने को मिलती है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना में अपनी सेवाएं दीं और इसके बाद NASA के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम का हिस्सा बनीं। NASA ने उन्हें 1998 में अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना था।
NASA में जाने से पहले सुनीता विलियम्स अमेरिकी नौसेना में हेलिकॉप्टर पायलट और अधिकारी के तौर पर काम कर चुकी थीं। नौसेना में हासिल किया गया उनका अनुभव आगे चलकर अंतरिक्ष यात्री के प्रशिक्षण में काफी उपयोगी रहा।
NASA में चयन के बाद उन्होंने व्यापक प्रशिक्षण लिया और अपना पहला अंतरिक्ष अभियान शुरू किया। इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जुड़े कई अभियानों का हिस्सा बनीं। वह Expedition 14/15, Expedition 32/33 और Expedition 71/72 में शामिल रह चुकी हैं।
सुनीता विलियम्स ने अपने तीनों अंतरिक्ष अभियानों को मिलाकर कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं। NASA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, यह उनके तीनों अंतरिक्ष मिशनों में बिताए गए समय का कुल आंकड़ा है।
उनका तीसरा मिशन वर्ष 2024 में शुरू हुआ और यह उनके करियर का सबसे लंबा और अप्रत्याशित अभियान रहा। सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने 5 जून 2024 को बोइंग स्टारलाइनर के जरिए उड़ान भरी और 6 जून को ISS पहुंचे।
इस मिशन को शुरुआत में लगभग आठ दिनों के लिए तैयार किया गया था। हालांकि स्टारलाइनर में सामने आई तकनीकी समस्याओं के बाद NASA ने अंतरिक्ष यान को बिना क्रू के वापस धरती पर भेजने का निर्णय लिया। इसके बाद सुनीता और बुच विलमोर ISS पर Expedition 71/72 के क्रू का हिस्सा बन गए। दोनों अंतरिक्ष यात्री अंततः मार्च 2025 में स्पेसएक्स ड्रैगन के जरिए धरती पर वापस लौटे।
सुनीता विलियम्स के अंतरिक्ष करियर की प्रमुख उपलब्धियों में उनका स्पेसवॉक रिकॉर्ड भी शामिल है। उन्होंने अब तक 9 स्पेसवॉक किए हैं और इन दौरान कुल 62 घंटे 6 मिनट अंतरिक्ष के बाहर बिताए। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने महिला अंतरिक्ष यात्रियों के बीच सबसे ज्यादा कुल स्पेसवॉक समय का रिकॉर्ड बनाया। NASA की ऑल-टाइम सूची में वह चौथे स्थान पर हैं।
जनवरी 2025 में किए गए एक स्पेसवॉक के दौरान सुनीता ने पैगी व्हिटसन के महिला अंतरिक्ष यात्रियों के कुल स्पेसवॉक समय के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। उस समय उनका कुल स्पेसवॉक समय 60 घंटे 21 मिनट से अधिक हो गया था। बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 62 घंटे 6 मिनट हो गया।
सुनीता विलियम्स की पहचान सिर्फ NASA की अंतरिक्ष यात्री के रूप में ही नहीं है। उनकी भारतीय पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण भारत में भी उनके अंतरिक्ष अभियानों को विशेष रुचि के साथ देखा जाता है।
उनके पिता का परिवार गुजरात के झुलासन गांव से जुड़ा हुआ है। सुनीता ने अलग-अलग मौकों पर अपनी भारतीय पारिवारिक विरासत और संस्कृति के प्रति लगाव भी जाहिर किया है। उनके अंतरिक्ष अभियानों के दौरान भारतीय संस्कृति से जुड़ी कुछ चीजों को लेकर भी काफी चर्चा हुई है।