तेल की पाइपलाइन Source- Social Media
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होर्मुज के बाद सऊदी ने भी बंद की तेल की पाइपलाइन, भारत में महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?

Saudi Oil Pipeline Shutdown: सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन ड्रोन हमले के बाद बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत पर भी असर पड़ सकता है।

अर्पित शुक्ला

Saudi Arabia Closes Oil Pipeline: मिडिल ईस्ट जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ता दिख रहा है। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया गया है। सऊदी अरब की यह पाइपलाइन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता मानी जाती थी। इस पाइपलाइन के बंद होने से दुनिया की तेल सप्लाई को लेकर टेंशन बढ़ गई है।

मीडिया एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अगर पाइपलाइन जल्द शुरू नहीं होती है तो वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 4 फीसदी हिस्सा इससे प्रभावित हो सकता है। सऊदी अरब की यह पाइपलाइन लगभग 1,200 किलोमीटर लंबी है। यह अरब प्रायद्वीप को पार करते हुए कच्चे तेल को लाल सागर के पास यानबू पोर्ट तक पहुंचाती है। 

 दुनिया की 4 से 5 फीसदी तेल सप्लाई

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद इस पाइपलाइन से करीब 40 से 50 लाख बैरल तेल रोजाना भेजा जा रहा था, जो दुनिया भर की कुल तेल सप्लाई का करीब 4 से 5 फीसदी हिस्सा है। यह रूट इसलिए भी जरूरी हो जता है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण टैंकरों की आवाजाही लगभग ना के बराबर है। ऐसे में सऊदी अरब की यह पाइपलाइन एक अहम विकल्प बन गई थी।

यानबू में सिर्फ 5 से 7 दिन का स्टॉक

पाइपलाइन बंद होने के बाद अब यानबू में रखे तेल के भंडार पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा स्टॉक के सहारे सऊदी अरब लगभग 5 से 7 दिन तक अपना निर्यात जारी रख सकता है। मिस्र के ऐन सुखना और सिदी केरीर बंदरगाहों पर मौजूद सऊदी अरब के अतिरिक्त भंडार से कुछ और समय तक मदद मिल सकती है, लेकिन यह स्थिति पाइपलाइन के लंबे समय तक बंद रहने की पूरी तरह भरपाई नहीं कर सकती।

पाइपलाइन की मरम्मत में कितना समय लगेगा, इस पर अभी अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं। कुछ का कहना है कि इसमें कई सप्ताह लग सकते हैं, हालांकि यह संभावना भी जताई जा रही है कि सीमित मात्रा में पंपिंग अपेक्षाकृत जल्द दोबारा शुरू हो सकती है।

सऊदी का तेल उत्पादन भी हुआ कम

पाइपलाइन से जुड़ा यह संकट ऐसे वक्त में सामने आया है, जब सऊदी अरब पहले से ही अपने तेल उत्पादन में बड़ी कटौती कर चुका है। रॉयटर्स के अनुसार, अगस्त में देश का कच्चे तेल का उत्पादन लगभग 62 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी में दर्ज 1.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन के स्तर से काफी कम है।

उत्पादन में इस भारी गिरावट और निर्यात के वैकल्पिक मार्गों में आई रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। इसके चलते OPEC+ देशों की सप्लाई बढ़ाने की योजनाओं पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमत पर होगा असर

सऊदी पाइपलाइन के बंद होने की सूचना के बाद तेल बाजार में तेज उछाल दर्ज किया गया। रॉयटर्स के अनुसार, 14 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर लगभग 107.81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI करीब 102.94 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड हो रहा था।

अगर पाइपलाइन जल्द बहाल नहीं होती और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तथा लाल सागर में भी तेल की सप्लाई बाधित रहती है, तो बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं और गहरा सकती हैं। ऐसी परिस्थिति में कच्चे तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है, जिसका असर पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दामों पर भी दिखाई दे सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी तेल की जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात पर निर्भर होकर पूरा करता है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यह प्रभाव आयात बिल में बढ़ोतरी, महंगाई में इजाफा और परिवहन लागत बढ़ने के रूप में आम लोगों तक पहुंच सकता है।

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