ईरान का जॉर्डन पर मिसाइल हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

जॉर्डन के समर्थन में आया सऊदी अरब, ईरान के मिसाइल हमले को बताया बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना

Iran Attack On Jordan: पश्चिम एशिया संकट के बीच जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों की सऊदी अरब ने कड़ी आलोचना करते हुए इसे बेवजह और बेरहम बताया तथा जॉर्डन के समर्थन का ऐलान किया।

प्रिया सिंह

Saudi Condemns Iran Attack On Jordan: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के कथित मिसाइल हमलों को लेकर सऊदी अरब ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को बेवजह और बेरहम बताते हुए जॉर्डन के साथ एकजुटता जताई है।

रियाद ने कहा कि जॉर्डन की सुरक्षा और स्थिरता को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध किया जाना चाहिए। साथ ही सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने और मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है।

जॉर्डन की संप्रभुता के समर्थन में सऊदी अरब

सऊदी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में ईरान के हमलों की आलोचना की। रियाद ने कहा कि पड़ोसी देशों पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि वह जॉर्डन की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले जरूरी कदमों के समर्थन में खड़ा है। रियाद ने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया।

जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर 20 बैलिस्टिक मिसाइलों का दावा

इस घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सेना की ओर से ईरान से जुड़े पांच तेल टैंकरों पर हमले के दावे सामने आए। इसके कुछ घंटों बाद ईरान ने जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की कार्रवाई की।

जॉर्डन के सुरक्षा बलों ने इसके बाद एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय किया। जॉर्डन की सेना के अनुसार, उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ने 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

सेना का दावा है कि बाकी दो मिसाइलें आबादी से दूर खाली इलाकों में जाकर गिरीं। इसके चलते किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली। हालांकि, इन सैन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिकी युद्धपोत को निशाना बनाने का दावा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी साझा की। CENTCOM के मुताबिक, ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की।

अमेरिकी सेना ने इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट में भी बढ़ा तनाव

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में गुजर रहे जहाजों के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया। ईरानी सेना के मुताबिक, उसने क्षेत्र में 10 अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया।

ईरान का दावा है कि इनमें दो अमेरिकी जहाज और आठ तेल टैंकर शामिल थे, जो उसके द्वारा प्रतिबंधित घोषित क्षेत्र से गुजर रहे थे। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

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