S Jaishankar UNGA Speech 2026: अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है। इस बीच शनिवार को भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने महासभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा और भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति को दोहराया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वालों की ओर से इसे सामान्य बताने और इसके नतीजों से बचने की दलीलें नहीं टिकेंगी।
विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध अपनी सुरक्षा के अधिकार का हम इस्तेमाल करते रहेंगे। एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति भारत जीरो-टॉलरेंस नीति में कोई ढिलाई नहीं बरतेगा। इसके साथ ही दुनियाभर में चल रहे युद्धों को लेकर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि इन युद्धों की समाप्ति होनी चाहिए।
शुक्रवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने भारत के साथ 2025 में हुए संघर्ष को समाप्त कराने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद दिया। अपने 23 मिनट के भाषण में शहबाज शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए भारत को घेरने की कोशिश की थी।
वहीं, शनिवार को जयशंकर ने महासभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने और इसके नतीजों से बचने के लिए दलीलें दी गईं। उन्होंने कहा कि ऐसी दलीलें नहीं टिकेंगी।
जयशंकर ने कहा कि दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते। उन्होंने कहा कि हम आतंकवाद के खिलाफ अपना बचाव करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने कहा, और ऐसी सोच पर आधारित समझौतों पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रुख बदलना होगा। जयशंकर ने दुनिया के नेताओं से कहा कि आतंकवाद शांति के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। इसके खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति को अपनाना जरूरी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दुख की बात है कि मध्य पूर्व में तनाव और हिंसा जारी है। भारत का दृढ़ विश्वास है कि स्थायी शांति के लिए टू-स्टेट सॉल्यूशन की जरूरत है। हम इस स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हर संभव कोशिश करने के लिए हमेशा तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि हम फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में योगदान दे रहा है। दुनिया को यह समझना होगा कि शांति का अर्थ केवल युद्ध का न होना नहीं है। अगर हम दुनिया में लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रहे है, तो हम वास्तव में एक गहरी खाई के किनारे पर जी रहे हैं। हम उस खाई में जाने से सिर्फ एक कदम दूर हैं। इसलिए हमें स्थिरता, सुरक्षा और पूर्वानुमान-योग्यता को मजबूत करना जरूरी है।