Russia Drone Attack Latest News In Hindi: एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए 'ट्रंप डेडलाइन' और मियामी में होने वाली संभावित शांति वार्ता की चर्चा तेज है वहीं दूसरी तरफ जमीन पर युद्ध ने और भी भयानक रूप ले लिया है।
शनिवार, 7 फरवरी 2026 को रूस ने यूक्रेन के खिलाफ इस साल का अब तक का सबसे विध्वंसक हवाई हमला किया। रूसी सेना ने एक ही रात में 400 से अधिक ड्रोन और लगभग 40 मिसाइलें दागकर यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हिला कर रख दिया है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि रूस का मुख्य निशाना देश की बिजली उत्पादन इकाइयां, एनर्जी ग्रिड और महत्वपूर्ण वितरण सब-स्टेशन थे। इस हमले का उद्देश्य कड़ाके की सर्दी के बीच यूक्रेन की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करना है। जेलेंस्की ने कहा कि मॉस्को 'सर्दियों के दबाव' को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
इस भारी गोलाबारी में केवल सैन्य या ऊर्जा ठिकाने ही नहीं बल्कि नागरिक संपत्तियां भी तबाह हुई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रिव्ने क्षेत्र में एक बहुमंजिला अपार्टमेंट इमारत को नुकसान पहुंचा है जबकि विनित्सिया क्षेत्र के लाडिजिन शहर में एक सामान्य कॉलेज की प्रशासनिक इमारत पर ड्रोन गिरा।
इसके अलावा वोलिन, इवानो-फ्रांकीव्स्क और लविव जैसे क्षेत्रों में भी भारी नुकसान की खबरें हैं। राजधानी कीव और खार्किव में एयर डिफेंस सिस्टम घंटों तक सक्रिय रहे लेकिन मिसाइलों की संख्या इतनी अधिक थी कि कई जगहों पर सुरक्षा घेरा टूट गया।
शांति वार्ता के प्रस्तावों के बीच जेलेंस्की ने उन देशों पर निशाना साधा है जो रूस के साथ त्रिपक्षीय बातचीत का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो देश बातचीत की वकालत करते हैं उन्हें रूस की इस बर्बरता पर जवाब देना होगा। जेलेंस्की ने एक बार फिर अमेरिका और पश्चिमी देशों से पैट्रियट और NASAMS जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अधिक मिसाइलों की मांग की है।
यह भी पढ़ें:- UPI की एंट्री से कॉन्सुलेट तक… मलेशिया में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान; जानें भारतीय समुदाय के बीच क्या-क्या बोले?
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने जून 2026 तक युद्ध खत्म करने की डेडलाइन दी है जिसके बाद रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस समयसीमा से पहले अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। यूक्रेन ने स्पष्ट किया है कि हर एक विदेशी शिपमेंट उन्हें इस कठिन सर्दी से लड़ने और रूसी आतंक को रोकने में मदद करती है। फिलहाल कई प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है।