Highlights:
यूक्रेन के अलर्ट सिस्टम में परमाणु और रासायनिक हमले के फर्जी संदेश भेजे गए।
रूस में भी परमाणु हमले की झूठी चेतावनी देकर लोगों में दहशत फैलाई गई।
दोनों देशों ने एक-दूसरे पर साइबर हमले के आरोप लगाए।
Russia Ukraine Air Raid Alert: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब साइबर हमलों के नए मोर्चे तक पहुंच गया है। रविवार (1 नवंबर) को पहले यूक्रेन के एयर रेड अलर्ट सिस्टम को हैक कर लिया गया। इसके बाद देशभर में सायरन बजने लगे और लोगों के मोबाइल पर परमाणु हमले, रासायनिक हमले और सड़कों पर गोलीबारी होने की फर्जी चेतावनियां भेजी गईं। कुछ घंटे बाद रूस के आपातकालीन अलर्ट सिस्टम पर भी साइबर हमला हुआ। वहां भी लोगों को परमाणु हमले से जुड़े फर्जी संदेश मिले। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर साइबर हमले के आरोप लगाए हैं।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में फर्जी अलर्ट रात करीब 10:47 बजे शुरू हुए। सबसे पहले राजधानी कीव में रेडिएशन खतरे का संदेश भेजा गया। इसमें कहा गया कि शहर में विकिरण का खतरा घोषित कर दिया गया है। इसके करीब एक मिनट बाद रूसी भाषा में दूसरा संदेश आया।
इसमें लिखा था कि पूरे यूक्रेन में परमाणु हमले का अलर्ट जारी होगा और घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रूस की ओरेशनिक मिसाइल आ रही है। इसके बाद रासायनिक हमले और कीव की सड़कों पर गोलीबारी होने की चेतावनी दी गई। लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह भी दी गई।
यूक्रेन की खुफिया एजेंसी ने स्पष्ट किया कि देश में रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है। उसने लोगों से शांति बनाए रखने और आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की। ल्वीव क्षेत्र में लाउडस्पीकर के जरिए भी रेडिएशन संबंधी चेतावनी प्रसारित हुई थी। बाद में यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्रालय ने एयर अलर्ट ऐप को रखरखाव के नाम पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया।
यूक्रेन के बाद रूस के आपातकालीन मंत्रालय ने भी अपने अलर्ट ऐप पर बड़े साइबर हमले की पुष्टि की। मंत्रालय के मुताबिक, हैकर्स ने लोगों तक गलत सूचनाएं पहुंचाईं। यूक्रेनी समाचार एजेंसी UNN की रिपोर्ट के अनुसार, रूस में परमाणु हमले की फर्जी चेतावनी भेजी गई।
यूक्रेन समर्थक संगठन अतेश ने टेलीग्राम पर इसका स्क्रीनशॉट साझा किया। संदेश में दावा किया गया कि यूक्रेन के हमलावर ड्रोन से जुड़े परमाणु हथियार रूस के सभी क्षेत्रों की ओर छोड़े गए हैं। लोगों को तीन सप्ताह का राशन जमा करने और छिपने की सलाह भी दी गई।
हालांकि, रूसी आपातकालीन मंत्रालय ने कहा कि साइबर हमले का असर केवल मोबाइल ऐप पर पड़ा है। देश की सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है।
रूस और यूक्रेन के बीच साइबर हमले पहले भी होते रहे हैं। जनवरी 2022 में रूसी हैकर्स ने यूक्रेन की सरकारी और बैंकिंग वेबसाइटों को निशाना बनाया था। 2023 में रूसी हैकर समूह सैंडवर्म ने यूक्रेन के कीवस्टार टेलीकॉम नेटवर्क को प्रभावित किया था। इसके जवाब में यूक्रेनी समूहों ने भी मॉस्को के खिलाफ कई साइबर हमले किए थे।
ताजा घटनाओं ने दिखाया है कि दोनों देशों के बीच युद्ध अब केवल मिसाइलों और ड्रोन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सिस्टम और आम नागरिकों के बीच दहशत फैलाने की कोशिशें भी इसका हिस्सा बन रही हैं।