EU का यूक्रेन को बड़ा झटका  सांकेतिक AI मॉडिफाइड फोटो
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NATO के बाद अब EU ने भी फेरा यूक्रेन से मुंह? रूसी खुफिया एजेंसी SVR का बड़ा दावा, कीव की बढ़ी टेंशन

EU Refused Ukraine Membership: रूसी खुफिया एजेंसी SVR ने दावा किया है कि EU के नेता गुप्त रूप से यूक्रेन की सदस्यता खारिज कर चुके हैं और वे केवल आर्थिक-सैन्य हितों के लिए कीव को गुमराह कर रहे है।

अमन उपाध्याय

EU Membership Ukraine: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ आया है। रूसी खुफिया एजेंसी ‘फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस’ (SVR) ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि NATO के बाद अब यूरोपीय संघ (EU) ने भी यूक्रेन को अपना सदस्य बनाने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।

एजेंसी के मुताबिक, यूरोपीय नेता सार्वजनिक मंचों से तो यूक्रेन के ‘उज्ज्वल भविष्य’ की कसमें खा रहे हैं, लेकिन बंद कमरों में हुई बातचीत में उन्होंने सदस्यता की किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है।

तोप का चारा बना रहा है यूरोप?

SVR की रिपोर्ट में यूरोपीय नौकरशाहों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा किया गया है कि ब्रुसेल्स जानबूझकर यूक्रेनी जनता को गुमराह कर रहा है ताकि उन्हें रूस के खिलाफ युद्ध में ‘तोप का चारा’ के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन में बढ़ते असंतोष और ‘यूरोप से दूर होने’ की निराशा को रोकने के लिए जून में उन्हें सदस्यता-पूर्व बातचीत का ‘लालच’ दिया गया था। इसके अलावा, कीव को यूरोपीय सुरक्षा नीति का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है, लेकिन इसमें उन्हें वोट देने का कोई अधिकार नहीं होगा।

मदद के लिए लोगों को धोखे में रख रही कीव सरकार?

रूसी एजेंसी का कहना है कि यूक्रेन के राजनयिकों को इस असल स्थिति की पूरी जानकारी है और उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इससे अवगत भी कराया है। हालांकि, कीव की सरकार यह जानते हुए भी चुप है क्योंकि उसका अस्तित्व पूरी तरह से यूरोप से मिलने वाली आर्थिक और सैन्य मदद पर टिका है।

SVR के अनुसार, कीव और ब्रुसेल्स दोनों ही यूक्रेन की धरती को आधुनिक हथियारों और युद्ध की नई तकनीकों के परीक्षण के लिए एक लैबोरेट्री की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं।

कैसे गहराया विवाद?

यह विवाद तब और गहरा गया है जब 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद नाटो ने यूक्रेन को सदस्यता देने से मना कर दिया था, क्योंकि इससे अमेरिका सहित सभी सदस्य देशों को सीधे युद्ध में उतरना पड़ता। गौरतलब है कि 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही यूक्रेन का झुकाव पश्चिमी देशों की ओर बढ़ा, जिसे रूस ने हमेशा अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखा।

रूस का मानना है कि यूरोपीय संघ यूक्रेन के जरिए रूस को ‘रणनीतिक हार’ देने का दिवास्वप्न देख रहा है, जिसका कोई वास्तविक आधार नहीं है। अब देखना यह है कि रूस की खुफिया एजेंसी का यह दावा भविष्य में क्या मोड़ लेता है।

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