लिस्बन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुर्तगाल और स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर हैं, जो भारत की ओर से इन दोनों देशों में दो दशक से अधिक समय बाद हो रही है। रविवार रात वह पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंचीं, जहां उनका राजकीय स्वागत हुआ। यह दौरा दोनों देशों के साथ भारत के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है, जिससे यह यात्रा और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा भारत की विदेश नीति में नए आयाम जोड़ने वाली मानी जा रही है।
भारत और पुर्तगाल के रिश्ते समय के साथ और मजबूत हुए हैं। राष्ट्रपति मुर्मू पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा के निमंत्रण पर 7 से 9 अप्रैल तक लिस्बन में रहेंगी। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 1998 के बाद किसी भारतीय राष्ट्रपति की पुर्तगाल की यह पहली यात्रा है। विदेश मंत्रालय के सचिव तन्मय लाल ने इसे प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक बताया, जिससे दोनों देशों के बहुआयामी सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
9 से 10 अप्रैल तक राष्ट्रपति मुर्मू स्लोवाकिया में रहेंगी। यह दौरा स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेल्लेग्रिनी के निमंत्रण पर हो रहा है। पिछले 29 वर्षों में पहली बार किसी भारतीय राष्ट्रपति का यह दौरा हो रहा है, जो दोनों देशों के आपसी संबंधों को नया विस्तार देगा। यह भी बता दे कि दोनो देशों के राजनयिक संबंध परस्पर 50 साल पूरे कर रहे है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह यात्रा भारत और यूरोप के रिश्तों को और सशक्त करेगी। बीते वर्षों में पुर्तगाल और स्लोवाकिया के साथ भारत के संबंधों में तेजी आई है। इस दौरे के माध्यम से व्यापार, संस्कृति, शिक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में नये अवसर खुल सकते हैं। बता दें कि यह भारतीय राष्ट्रपति की यह यात्रा 27 साल बाद अब हो रही है।
इससे पहले तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति के. आर. नारायण ने 1998 में पुर्तगाल की यात्रा करी थी। वहीं स्लोवाकिया की यात्रा पर भी 29 वर्षों में हो रही है, यह यात्रा स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेल्लेग्रिनी के निमंत्रण पर की जा रही है।