PoK Army Attack: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से भयंकर विरोध प्रदर्शन लगातार हो रहे हैं। वहां लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ परेशान जनता सड़कों पर उतर आई है। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कुचलने के लिए पाकिस्तान की सेना ने बेहद खौफनाक कदम उठाए हैं। एक सीक्रेट डोजियर से वहां हुए भयंकर खून-खराबे और कत्लेआम की असली सच्चाई पूरी दुनिया के सामने आ गई है।
एक बहुत ही अहम दस्तावेज के अनुसार 5 से 9 जून के बीच भारी हिंसा हुई। इस दौरान जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रदर्शनकारियों पर सीधा बल प्रयोग किया गया। सेना की इस क्रूर और अमानवीय कार्रवाई में अब तक 26 मासूम लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। मारे गए लोगों में 19 बच्चे और 7 गर्भवती महिलाएं भी दुखद रूप से शामिल हैं।
विरोध प्रदर्शनों को पूरी तरह से कुचलने के लिए पाकिस्तान ने लगभग 14,000 अतिरिक्त जवानों को वहां भेजा है। इन सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां और खतरनाक हथियारों का भयंकर इस्तेमाल किया। हालात को काबू करने के नाम पर सेना ने आम लोगों के साथ भयानक और बेहद क्रूर बर्ताव किया है। इस बड़े कत्लेआम की तस्वीरें और वीडियो बाहर न जाएं इसके लिए भारी इंटरनेट पाबंदी वहां लगाई गई। पूरे इलाके में संचार सेवाओं को पूरी तरह से बंद करके ब्लैकआउट की भयंकर स्थिति बना दी गई। पाकिस्तानी सेना का मुख्य उद्देश्य अपने इस भयानक सुरक्षा अभियान के काले सबूतों को दुनिया से छिपाना था।
इस खौफनाक हिंसा के दौरान जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के कई प्रमुख नेताओं को सेना ने अपना निशाना बनाया है। विरोध की आवाज दबाने के लिए कई अहम और बड़े नेताओं को जान से मारने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। पुलिस ने लोगों के लंबे और बड़े मार्च को रोकने के लिए कई सख्त और कड़ी चेतावनियां भी जारी की हैं।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इस भयानक और दर्दनाक स्थिति पर अपनी बहुत ही कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने पाकिस्तान पर मानवाधिकारों के भारी हनन और झूठी खबरें फैलाने का बहुत गंभीर आरोप लगाया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह इस अमानवीय कृत्य के लिए पाकिस्तान से सख्त जवाब मांगे।
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यह भयंकर और खौफनाक आंदोलन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का एक बहुत बड़ा विषय बन चुका है। ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरियों ने इस क्रूरता के खिलाफ पाकिस्तानी मिशन के बाहर अपना बड़ा प्रदर्शन किया। 30 ब्रिटिश सांसदों ने अपनी सरकार को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत दखल देने की अहम मांग की है।