न्यूयॉर्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को संबोधित करते हुए सस्टेनेबल टेवलपमेंट का जिक्र किया। उन्होंने कहा आज मैं यहां मानवता के छठे हिस्से की आवाज को सुनने के लिए आया हूं... हमने भारत में 250 मिलियन यानी 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और हमने दिखाया है कि सतत विकास सफल हो सकता है। हम सफलता के इस अनुभव को ग्लोबल साउथ के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मानवता की सफलता हमारी सामूहिक शक्ति में निहित है, युद्ध के मैदान में नहीं। वैश्विक शांति और विकास के लिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार महत्वपूर्ण हैं। सुधार प्रासंगिकता की कुंजी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जहां एक ओर आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर साइबर सिक्योरिटी, समुद्री और अंतरिक्ष संघर्ष के नए क्षेत्र बनकर उभर रहे हैं। इन सभी मुद्दों पर मैं इस बात पर जोर दूंगा कि वैश्विक कार्रवाई वैश्विक महत्वाकांक्षा के अनुरूप होनी चाहिए।
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प्रधानमंत्री मोदी ने प्रौद्योगिकी के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए संतुलित विनियमन आवश्यक है। उन्होंने वैश्विक डिजिटल गवर्नेंस का समर्थन किया, जिसमें सभी देशों की संप्रभुता और अखंडता बनी रहे। पीएम ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) को एक पुल के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि बाधा के रूप में। उन्होंने वैश्विक भलाई के लिए भारत की DPI साझा करने की प्रतिबद्धता जताई। भारत "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के सिद्धांत पर अडिग है और इस दिशा में काम करने के लिए तैयार है।