पाकिस्तान आर्मी चीफ असिम मुनीर, (कॉन्सेप्ट फोटो) 
विदेश

परमाणु हथियार से तीनों सेनाओं तक...अब सब पर असीम मुनीर का कंट्रोल, पाकिस्तान में विवादित बिल पास

Asim Munir: विपक्षी दलों ने आरोप लगया है कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के सांसद वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट कर गए और बिल की प्रतियां फाड़कर विरोध जताया।

मनोज आर्या

Pakistan National Assembly: भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में बुधवार को कुछ ऐसा हुआ है, जिसने पूरी दुनिया में हलचल बढ़ा दी है। देश की नेशनल असेंबली ने विवादित 27वां संवैधानिक संशोधन पास कर दिया है, जिसके बाद आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ताकत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इस बिल को दो-तिहाई बहुमत मिला है और सिर्फ चार सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट किया है।

इतना बड़ा बदलाव जिस तेजी से हुआ, उसने पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने वोटिंग का बहिष्कार किया और इस प्रक्रिया को लोकतंत्र की हत्या करार दिया।

कितने शक्तिशाली हो जाएंगे असीम मुनीर?

नए कानून के मुताबिक असीम मुनीर अब चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज की नई बनाई गई पोस्ट संभालेंगे। इस अधिकार के साथ उनके अधीन सेना के साथ नौसेना और एयरफोर्स भी आ जाएंगी। यानी उनके पास अब पाकिस्तान के राष्ट्रपति जैसी शक्तियां होंगी। इसके अलावा न्यूक्लियर हथियारों पर भी उनका कंट्रोल होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उनका रुतबा बरकरार रहेगा और उन्हें आजीवन कानूनी सुरक्षा मिल जाएगी। पाकिस्तान में इसे एक ऐसी शक्ति माना जा रहा है, जिसे वापस लेना लगभग नामुमकिन होगा।

संविधान संशोधन पर क्या बोले PM शहबाज?

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस संशोधन का बचाव करते हुए इसे संस्थागत तालमेल और राष्ट्रीय एकता का कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ फील्ड मार्शल के लिए नहीं बल्कि सभी तीनों सेनाओं की मान्यता का प्रतीक है। उनकी दलील है कि देश अपने हीरोज को सम्मान देना जानता है और यह कदम उसी दिशा में है।

बिल के विरोध में PTI सांसद

लेकिन दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि इससे सत्ता एक ही समूह के हाथों में सिमट सकती है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर चोट जैसा कदम है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के सांसद वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट कर गए और बिल की प्रतियां फाड़कर विरोध जताया। उनका कहना है कि संसद ने बिना चर्चा देश की न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर दिया है।

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