हफ्तार की सेना को हथियार देगा पाकिस्तान, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

हफ्तार की सेना को हथियार देगा पड़ोसी मुल्क, पाकिस्तान के इस फैसले से दुनिया में क्यों मचा हड़कंप?

Libya-Pakistan News: लीबिया में जारी गृहयुद्ध के बीच पाकिस्तान द्वारा लिबियन नेशनल आर्मी के साथ कथित 4 अरब डॉलर का हथियार सौदा विवादों में घिर गया है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने चेतावनी दी है।

अमन उपाध्याय

Pakistan Libya Arms Deal: लीबिया की विद्रोही सेना लिबियन नेशनल आर्मी (LNA) के साथ पाकिस्तान द्वारा किए गए कथित हथियार सौदे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘वन वर्ल्ड आउटलुक’ नामक संस्था की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने लगभग 4 अरब डॉलर का रक्षा सौदा LNA के साथ किया है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की हालिया विदेश यात्रा के दौरान तय हुआ। जब उनकी मुलाकात विवादित सैन्य कमांडर खलीफा हफ्तार के बेटे और LNA के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल साद्दाम हफ्तार से हुई। इस समझौते के तहत पाकिस्तान द्वारा जेएफ-17 लड़ाकू विमान, टैंक, तोपखाने और अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों की आपूर्ति किए जाने की बात कही गई है।

अब तक का सबसे बड़ा निर्यात सौदा

विशेषज्ञों का मानना है कि सतह पर यह पाकिस्तान के रक्षा उद्योग के लिए अब तक का सबसे बड़ा निर्यात सौदा प्रतीत होता है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लीबिया पर वर्ष 2011 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा हथियार प्रतिबंध लगाया गया था, ताकि देश में हथियारों की आपूर्ति रोककर हिंसा और गृहयुद्ध को कम किया जा सके।

लिबियन नेशनल आर्मी सरकार का हिस्सा है?

लिबियन नेशनल आर्मी, त्रिपोली स्थित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त सरकार का हिस्सा नहीं है बल्कि एक विद्रोही सैन्य गुट है जो लंबे समय से देश के पूर्वी हिस्सों पर नियंत्रण बनाए हुए है। ऐसे में इस गुट को हथियारों की आपूर्ति करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों की सीधी अवहेलना माना जा रहा है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस सौदे से लीबिया में पहले से जारी खूनी संघर्ष और अधिक भड़क सकता है, जिससे शांति प्रक्रिया को गंभीर झटका लगेगा। साथ ही, पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी गहरा नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। पहले से ही पाकिस्तान पर सेना-प्रभावित शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं और इस तरह के हथियार सौदे उन आरोपों को और मजबूती देते हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह संदेश जा सकता है कि पाकिस्तान उन गुटों के साथ खड़ा है जो संयुक्त राष्ट्र की शांति पहलों के खिलाफ हैं। इससे उन देशों के साथ पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं जो लीबिया में राजनीतिक समाधान और स्थिरता का समर्थन कर रहे हैं।

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