Attack on US Embassy in Pakistan: रविवार को कराची में अमेरिकी कॉन्सुलेट के बाहर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प में 8 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 30 लोग घायल हो गए। यह विरोध प्रदर्शन ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के खिलाफ था। प्रदर्शनकारी एमटी खान रोड पर स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट के पास जमा हुए और पत्थर फेंकते हुए कॉन्सुलेट के परिसर में घुसने की कोशिश की।
पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गोलाबारी की। बचाव अधिकारियों के अनुसार, घायल हुए लोगों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती किया गया है। हिंसा को रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, रेंजर्स और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों ने इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी है। विरोध प्रदर्शन के कारण कराची में ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।
सुल्तानाबाद से माई कोलाची जाने वाली सड़क को बंद कर दिया गया, जिससे ट्रैफिक जाम हो गया। कराची ट्रैफिक पुलिस ने जिन्ना ब्रिज से आने वाली गाड़ियों को II चुंदरीगर रोड की ओर मोड़ दिया, बोट बेसिन से आने वाले ट्रैफिक को माई कोलाची फाटक पर यू-टर्न दिया और PIDC से आने वाली गाड़ियों को वापस भेजा।
हिंसा तब बढ़ी जब ईरान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कॉन्सुलेट के गेट पर धावा बोल दिया, गार्डहाउस में आग लगा दी और बैरिकेड्स तोड़ दिए। चश्मदीदों के अनुसार, पाकिस्तानी सैनिकों और स्थानीय सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गोलीबारी की। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, आठ प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जबकि तीन अमेरिकी दूतावास के कर्मचारी घायल हुए हैं।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ, जनरल आसिम मुनीर ने बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा बलों को इलाके पर कड़ी निगरानी रखने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने की किसी को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, ट्रैफिक को नियंत्रित रखने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए अलग-अलग मार्गों का निर्धारण किया गया है।
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तेहरान में अमेरिकी और इजराइली हवाई हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर ने पाकिस्तान समेत कई देशों में विरोध प्रदर्शन भड़काए हैं। तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की सत्ता और राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले खामेनेई अब इतिहास बन गए हैं। उनकी मौत ने न केवल पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि उस विवादित शासन पर भी नई बहस शुरू कर दी है, जिसने पिछले 36 वर्षों तक ईरान पर कठोर नियंत्रण बनाए रखा।