Nirmal Purja Death: दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्वतारोहियों में गिने जाने वाले नेपाल के निर्मल पुर्जा (निम्स दाई) का पाकिस्तान के काराकोरम पर्वत क्षेत्र में स्थित ब्रॉड पीक पर हुए भीषण हिमस्खलन में निधन हो गया। इस हादसे में उनके अभियान दल के सभी 10 सदस्यों की मौत हो गई। उनकी कंपनी 'इलीट एक्सपेड' ने सोशल मीडिया के जरिए इस दुखद घटना की पुष्टि की। इस खबर के बाद दुनियाभर के पर्वतारोहियों में शोक का माहौल है।
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान हुआ। शुरुआती रिपोर्ट में बताया गया कि दोपहर के समय अचानक भारी हिमस्खलन आया, जिसकी चपेट में पूरा दल आ गया। बचाव अभियान शुरू किया गया, लेकिन मौसम खराब होने और ऊंचाई अधिक होने के कारण राहत कार्य काफी मुश्किल रहा। अब तक कई शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि अधिकारियों ने सभी पर्वतारोहियों के मारे जाने की पुष्टि की है। निर्मल के नाम 6 बड़े वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं।
निर्मल पुर्जा के नेतृत्व वाले इस अभियान दल में कुल 10 सदस्य शामिल थे। इनमें पांच नेपाली पर्वतारोही, पाकिस्तान के सोहेल साखी, ओमान की नधीरा अहमद अब्दुल्ला अल हार्थी, अमेरिका की मैलोरी गीस, एक चीनी नागरिक और एक अन्य विदेशी पर्वतारोही शामिल थे। हादसे में निर्मल पुर्जा के भरोसेमंद साथी पुर बहादुर गुरुंग (युक्टा) और निमा शेरपा की भी मौत हो गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय को गहरा झटका दिया है।
निर्मल पुर्जा की कंपनी 'इलीट एक्सपेड' ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि दुनिया ने एक ऐसे लीडर को खो दिया है, जिसने असंभव को संभव बनाने का साहस दिखाया। कंपनी ने कहा कि पुर्जा केवल एक पर्वतारोही नहीं थे, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा थे। उनकी सोच, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक ऊर्जा हमेशा लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
निर्मल पुर्जा के नाम पर्वतारोहण को लेकर 6 बड़े वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिन्हें लंबे समय तक असंभव माना जाता था। निर्मल पुर्जा ने साल 2019 में प्रोजेक्ट पॉसिबल शुरू किया था। इसके तहत वो दुनिया की 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों पर केवल सात महीने में चढ़ने वाले थे। इसे उस समय असंभव माना गया। क्योंकि इससे पहले ऐसा करने में 7 साल का समय लगा था। हालांकि निम्स और उनकी टीम ने सिर्फ छह महीने और छह दिन में यह कारनामा करके दिखाया था।
निर्मल पुर्जा के नाम पर पर्वतारोहण को लेकर कुल छह वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं-
निर्मल पुर्जा की यह उपलब्धि इतनी बड़ी थी कि 2021 में नेटफ्लिक्स ने इस पर '14 पीक्स: नथिंग इज़ इम्पॉसिबल' नाम की डॉक्यूमेंट्री बनाई। इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह उन्होंने बेहद कम समय में दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों पर सफलता हासिल की। डॉक्यूमेंट्री को दुनियाभर में काफी पसंद किया गया और इसके बाद निर्मल पुर्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बन गए।
17 जनवरी 2021 को निर्मल पुर्जा ने एक और बड़ा इतिहास रचा। उनके नेतृत्व में नेपाल के 10 पर्वतारोहियों की टीम ने पहली बार सर्दियों के मौसम में K2 पर्वत पर सफल चढ़ाई की। K2 को दुनिया का सबसे खतरनाक पर्वत माना जाता है। K2 पर्वत की खोज 1856 में हुई थी। इस पर पहली सफल चढ़ाई 1954 में हुई थी। इससे पहले सर्दियों में कोई भी टीम इस पर्वत की चोटी तक नहीं पहुंच सकी थी। इस सफलता ने नेपाल के पर्वतारोहियों की क्षमता को पूरी दुनिया के सामने साबित किया।
निर्मल पुर्जा की सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने कई कठिन पर्वतों पर बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के भी सफल चढ़ाई की। K2 की ऐतिहासिक चढ़ाई के दौरान भी उन्होंने अतिरिक्त ऑक्सीजन का इस्तेमाल नहीं किया। उनकी टीम सिर्फ 8,000 मीटर से ऊपर की चढ़ाई के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करती थी। निर्मल पुर्जा और उनकी टीम उनकी तेज रफ्तार के लिए भी जाने जाते थे। 2021 में उनकी टीम सिर्फ 48 घंटों में माउंट एवरेस्ट,ल्होत्से और मकालू पर सफल अरोहण करके नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
निर्मल पुर्जा का कहना था कि माउंट एवरेस्ट की तुलना में K2 कहीं अधिक कठिन और खतरनाक पर्वत है। उनके अनुसार, एवरेस्ट पर हर साल हजारों लोग चढ़ाई करते हैं, जबकि K2 पर बहुत कम पर्वतारोही पहुंच पाते हैं। यहां का मौसम बेहद तेजी से बदलता है और छोटी सी गलती भी जानलेवा साबित हो सकती है। इसी वजह से K2 को पर्वतारोहियों की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है।
निर्मल पुर्जा का जन्म नेपाल में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में कई वर्षों तक सेवा दे चुके थे, जबकि उनके दो भाई ब्रिटिश गोरखा में थे। खुद निर्मल भी 18 साल की उम्र में ब्रिटिश सेना की गोरखा ब्रिगेड में भर्ती हुए। बाद में उन्होंने ब्रिटेन की स्पेशल फोर्स में भी अपनी सेवाएं दीं। सेना में रहते हुए ही उनके अंदर कठिन चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित हुई।
पहाड़ों के प्रति निर्मल पुर्जा का लगाव धीरे-धीरे बढ़ता गया। पर्वतारोहण में सफलता मिलने के बाद उन्होंने 2018 में सेना की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह इस क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने लगातार कई रिकॉर्ड बनाए और दुनिया को दिखाया कि मजबूत इरादों के सामने कोई लक्ष्य असंभव नहीं होता। उनकी सफलता ने हजारों युवाओं को भी पर्वतारोहण की ओर आकर्षित किया।
निर्मल पुर्जा हमेशा कहते थे कि नेपाली पर्वतारोही और शेरपा केवल गाइड नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन पर्वतारोही हैं। शेरपा समुदाय से नहीं थे, लेकिन उनका मानना था कि बिना शेरपाओं की मदद के कोई भी अभियान नामुमकिन है। वो खुद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेपाली पर्वतारोहियों को सम्मान दिलाने के लिए लगातार काम किया। उनका मानना था कि दशकों से शेरपा समुदाय कठिन अभियानों को सफल बनाता आया है, लेकिन उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। उनकी कोशिशों से दुनिया की सोच बदलने लगी।
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निर्मल 'निम्स दाई' पुर्जा का निधन पर्वतारोहण जगत के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। उन्होंने अपने साहस, मेहनत और नेतृत्व से लाखों लोगों को प्रेरित किया। उनके बनाए रिकॉर्ड आने वाले वर्षों तक याद किए जाएंगे। ब्रॉड पीक पर हुआ यह हादसा उनके जीवन का अंतिम अध्याय जरूर बन गया, लेकिन उनकी उपलब्धियां और 'नथिंग इज इम्पॉसिबल' का संदेश आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।