नेपाल बाढ़ (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा पहुंचा 1204, करीब 3900 लोग अभी भी लापता

Nepal Flood Death Toll: नेपाल में भीषण जलप्रलय से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1204 पहुंच चुकी है, जबकि मलबे से 1114 शव बरामद किए जा चुके हैं और लगभग 3900 लापता लोगों की तलाश जारी है।

प्रिया सिंह

Nepal Flood Rescue Operations: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस विनाशकारी जलप्रलय में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1204 पहुंच गई है, जबकि करीब 3900 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव एजेंसियां लगातार मलबे और प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रही हैं। नेपाली सेना, पुलिस और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।

1204 लोगों की मौत, 11993 लोगों का हुआ रेस्क्यू

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ में अब तक 1204 लोगों की मौत हो चुकी है। राहत एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों से अब तक 1114 शव बरामद किए हैं।

वहीं करीब 3900 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। इस बड़े मानवीय संकट के बीच नेपाली सेना और बचाव दल अब तक रिकॉर्ड 11993 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सफल रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश में दिन-रात अभियान चलाया जा रहा है।

शवों की पहचान के लिए DNA जांच अभियान शुरू

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसे देखते हुए महाराजगंज स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल में विशेष फॉरेंसिक और DNA सैंपल एकत्र करने का अभियान शुरू किया गया है।

इस अभियान में भारत की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम नेपाल पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही है। टीम DNA जांच और नमूनों के मिलान के जरिए मृतकों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

इसके अलावा चीन, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया की तकनीकी टीमें भी आधुनिक फॉरेंसिक उपकरण और जांच किट के साथ इस अभियान में सहयोग कर रही हैं। प्रशासन ने लापता लोगों के परिजनों से जल्द से जल्द DNA नमूने जमा कराने की अपील की है।

हाईड्रो पॉवर प्लांट्स और सीमा क्षेत्रों में राहत अभियान

बाढ़ के साथ आए भारी कीचड़ और मलबे ने नेपाल के कई महत्वपूर्ण पहाड़ी क्षेत्रों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर राहत अभियान चला रहे हैं।

लांगटांग, चिलिमे और अपर त्रिशूली जैसे क्षेत्रों में स्थित महत्वपूर्ण हाईड्रो पॉवर प्लांट्स में जमा कीचड़ और विशाल पत्थरों को हटाने का काम जारी है। इन इलाकों में बचाव दलों को दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे करीब 2500 तीर्थयात्रियों को हिल्सा, तातोपानी और ल्हासा के हवाई मार्गों से सुरक्षित निकाला गया है। केरुंग सीमा के पास फंसे नेपाली नागरिकों और मालवाहक ट्रकों को निकालने के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है।

34 देशों के 590 विदेशी नागरिक भी लापता

प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद को संबोधित करते हुए बताया कि 26 अगस्त को ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में आए भीषण हिमस्खलन के बाद भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी। इस आपदा से रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है।

करीब 4000 लापता लोगों में 34 देशों के 590 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल सरकार भारत, चीन, अमेरिका, जापान, एडीबी, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से राहत सामग्री पहुंचाने तथा प्रभावित लोगों के दीर्घकालिक पुनर्वास पर काम कर रही है। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ती ऐसी आपदाओं से निपटना केवल नेपाल नहीं बल्कि पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।

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