चीन-नेपाल में सीमा विवाद, फोटो (सो. IANS) 
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ड्रैगन की नई चाल से नेपाल में आक्रोश: चीन ने भोटेकोशी नदी पर बनाई दीवार, 1963 के समझौते की उड़ी धज्जियां

Nepal China Border Dispute: चीन-नेपाल के बीच सीमा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। चीन ने भोटेकोशी नदी के किनारे एक सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू किए जाने के बाद नेपाल ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

अमन उपाध्याय

Nepal China Border Dispute Bhotekoshi River: हिमालयी पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। चीन द्वारा नेपाल-चीन सीमा पर भोटेकोशी नदी के किनारे अपनी तरफ एक सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू किए जाने के बाद नेपाल ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

इस निर्माण कार्य ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नेपाली नागरिकों के बीच भी डर और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

1963 के ऐतिहासिक समझौते का उल्लंघन

नेपाली अधिकारियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि चीन का यह कदम 1963 में दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक सीमा समझौते का सीधा उल्लंघन है। इस संधि के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले दोनों देशों के बीच आपसी सहमति और सूचना का आदान-प्रदान अनिवार्य है। समझौते में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि कोई भी पक्ष एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन नदियों का रास्ता नहीं बदल सकता, जो दोनों देशों के बीच प्राकृतिक सीमा का कार्य करती हैं।

आपदा का बढ़ता खतरा

भोटेकोशी नदी का यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और आपदा संभावित माना जाता है। नेपाली विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन को डर है कि यदि चीन की दीवार के कारण नदी का प्राकृतिक मार्ग बदलता है तो मानसून के दौरान नेपाल की तरफ विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। सिंधुपालचौक जिले का तातोपानी बॉर्डर पॉइंट, जो चीन के साथ व्यापार के लिए एक प्रमुख केंद्र है, पहले ही मानसून के दौरान भूस्खलन की मार झेलता रहता है। ऐसे में नदी के प्रवाह के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नेपाल के लिए भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान का कारण बन सकती है।

नेपाल सरकार की कूटनीतिक कार्रवाई

नेपाल के गृह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि यह निर्माण कार्य पिलर नंबर 53 के पास हो रहा है। हालांकि निर्माण चीनी सीमा के भीतर बताया जा रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सीमावर्ती नदियों पर निर्माण के प्रभाव का आकलन करना आवश्यक है। सिंधुपालचौक के मुख्य जिला अधिकारी रामकृष्ण अधिकारी की रिपोर्ट के बाद, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सक्रियता दिखाई है।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने चीन से इस निर्माण कार्य को तुरंत रोकने की मांग की है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन को एक आधिकारिक पत्र भेजकर इस बिना जानकारी वाले निर्माण पर कड़ा विरोध जताया गया है।

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