नतांज न्यूक्यिलर सैटेलाइट इमेज (फोटो- सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरान का नतांज क्यों बना पहला निशाना? क्या यही है कैराना हिल, जानिए असली वजह

इजराइल ने 2024-25 में बार-बार ईरान के नतांज परमाणु संयंत्र को निशाना बनाया है, जिसे वह हथियार कार्यक्रम का केंद्र मानता है। ये हमला क्षेत्रीय तनाव का एक बड़ा कारण बन सकता है।

सौरभ शर्मा

तेहरान: ईरान का नतांज संयंत्र यूरेनियम संवर्धन का दिल कहा जाता रहा है। जाग्रोस पहाड़ियों के भीतर बना यह अड्डा हजारों सेंट्रीफ्यूज चलाता है, जिनसे 60 फीसद तक शुद्ध यूरेनियम बनता है ।जो कि बस 90 फीसद के हथियार स्तर से थोड़ा कम है। साथ ही इसका इजरायल को डर है कि यही जगह तेहरान को बम के करीब ले जाएगी, इसलिए उसने 2010 से साइबर वायरस से लेकर 2025 की मिसाइल स्ट्राइक तक लगातार हमले करता रहा है। कई बार उत्पादन रुका, पर ईरान हर बार सिस्टम दोबारा चालू कर लेता है। अब सवाल ये भी है कि यह खेल कब तक चलता रहेगा और कहां जाकर ठहरेगा।

नतांज गहरा है, लेकिन अजेय नहीं। हर हमले से ईरान 6‑24 महीने पीछे जाता है, पर नई मशीनें और वैकल्पिक साइटें उसे फिर आगे ला देती हैं। इसी चक्र को तोड़ना इजराइल का मकसद है और यही क्षेत्रीय टकराव का मूल। ईरानी परमाणु ठिकाने पहले भी निशाने पर रहे। 2009 में खुला फोर्डो प्लांट पहाड़ के भीतर है, लेकिन 2021 में वहां भी ड्रोन हमला हुआ। 2012‑14 के बीच तेहरान में 6 शीर्ष वैज्ञानिक बम धमाकों में मारे गए। 2020 में मोसेन फखरीजादे पर घातक ऑटो‑गन अटैक हुआ। इन घटनाओं ने दिखाया कि सुरक्षा परतें जितनी भी मोटी हों, बाहर से आई तकनीक और अंदरूनी भेदिये उन्हें भेद सकते हैं।

कैराना हिल नाम की कोई आधिकारिक जगह नहीं

ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी "कैराना हिल" नाम की कोई आधिकारिक जगह नहीं है। यह पाकिस्तान के परमाणु हथियार भंडारण से बस एक तुलना है। दरअसल यह भौगोलिक स्थिति यानी नतांज के आसपास की पहाड़ियों या इसकी रणनीतिक स्थिति को संदर्भित कर सकता है। नतांज जाग्रोस पर्वत के पास स्थित है। इसकी भूमिगत संरचना इसे हवाई हमलों से बचाने के लिए बनाई गई है। कुछ लोग इसकी तुलना पाकिस्तान के कहुता संयंत्र से करते हैं, जिसे 1980 के दशक में "कैराना हिल" कहा जाता था, जब पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार विकसित कर रहा था।

पाकिस्तान से समानता और फर्क

दोनों ने P‑1 डिज़ाइन वाली सेंट्रीफ्यूज तकनीक से शुरुआत की।

पाकिस्तान ने खुलकर हथियार बनाए; उसके पास आज 165 वारहेड माने जाते हैं।

ईरान “बिजली और दवा” का दावा करता है, पर पश्चिम को शक है।

पाकिस्तान को कभी‑कभी अमेरिकी शह मिली, जबकि ईरान पर कड़े प्रतिबंध हैं।

इजरायली हमलों की कड़ी

2010 स्टक्सनेट वायरस ने रोटर तोड़े, प्रोग्राम 18 महीने पीछे गया।

2020 रहस्यमय आग से नई मशीनें जलीं।

2021 ब्लैकआउट ने पावर ग्रिड गिराया, सेंट्रीफ्यूज रूके।

2024 हवाई रक्षा पर ड्रोन हमला।

2025 सीधी मिसाइल स्ट्राइक, IRGC के कई अफ सर मारे गए।

इरादे साफ तेहरान को हथियार सीमा पार न करने देना।

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