आरएसएस चीफ मोहन भागवत  सोर्स- सोशल मीडिया
विदेश

न्यूयॉर्क में गूंजा गीता का संदेश, मोहन भागवत बोले- कृष्ण चेतना में छिपा दुनिया के संकटों का समाधान

ISKCON New York: मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा कि दुनिया के जारी विवादों का समाधान कृष्ण चेतना में है। गीता भागने की नहीं, बल्कि मजबूती से खड़े होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देती है।

अनन्या तिवारी

RSS Chief New York Visit: आज जब पूरी दुनिया विभिन्न विवादों, आपसी टकरावों और अलग-अलग पहचानों की जंग में बंटी नजर आ रही है, तब न्यूयॉर्क की ऐतिहासिक धरती से मानवता को एकजुट करने का एक बेहद शक्तिशाली संदेश सामने आया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक ISKCON केंद्रों का दौरा किया। इस्कॉन की स्थापना के 60वें गौरवशाली वर्ष के अवसर पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज दुनिया में बढ़ते संघर्षों और द्वंद्वों के बीच केवल 'कृष्ण चेतना' ही वह परम शक्ति है जो संपूर्ण मानवता को आपस में जोड़ सकती है।

मोहन भागवत ने दिया वैश्विक एकता का संदेश

न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक इस्कॉन स्थलों का दौरा करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने वैश्विक एकता का बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया कृष्ण चेतना ही है। आज के इस युग में हमारे सामने अनगिनत संघर्ष और द्वंद्व खड़े हैं। इस दौर में केवल एक ही चीज हमें एकजुट कर सकती है और वह हमारी साझा चेतना है। यह चेतना वास्तव में कृष्ण चेतना ही है।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भले ही दुनिया में कितनी भी विविधताएं, मतभेद या टकराव क्यों न हों, लेकिन वास्तविकता यही है कि सब कुछ कृष्ण ही हैं। भगवद गीता हमें इसी सत्य और एकात्मकता का मार्ग दिखाती है।

भागो नहीं, डटे रहो और कर्तव्य निभाओ

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने गीता के व्यावहारिक संदेश को बहुत ही सरल शब्दों में रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवद गीता किसी को भी सांसारिक जिम्मेदारियों से भागने या दुनिया को छोड़कर संन्यास लेने की सीख नहीं देती। उन्होंने कहा, "जीवन से दूर मत भागो। पूरी मजबूती से खड़े रहो और अपने कर्तव्य का पालन करो, क्योंकि सब कुछ कृष्ण ही हैं।" आरएसएस प्रमुख का मानना है कि यदि यह पावन संदेश दुनिया के हर व्यक्ति के दिल तक पहुंच जाए, तो यह भौतिकवादी संसार एक स्वर्ग जैसी सुंदर जगह में तब्दील हो जाएगा।

दो महान संगठन, एक ही संकल्प

दिलचस्प बात यह है कि जहां इस्कॉन अपनी स्थापना का 60वां वर्ष मना रहा है, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी अपने स्थापना के 100 वर्ष (शताब्दी वर्ष) पूरे करने की ओर बढ़ रहा है। इस अनूठे संयोग पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भले ही दोनों संगठनों के काम करने के तरीके अलग हों और वे अलग-अलग परिस्थितियों में कार्य कर रहे हों, लेकिन दोनों का मूल उद्देश्य एक ही चेतना का प्रसार करना है। उन्होंने कहा, "हम सभी अलग-अलग परिस्थितियों में, अपने-अपने विशेष तरीकों से कृष्ण चेतना को फैलाने का एक जैसा ही काम कर रहे हैं।"

मैनहट्टन की ऐतिहासिक यात्रा और इस्कॉन की बड़ी उपलब्धियां

अपनी इस यात्रा के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत मैनहट्टन स्थित ऐतिहासिक '26 सेकेंड एवेन्यू' भी पहुंचे। यह वही पावन और ऐतिहासिक स्थान है जहां 1966 में स्वामी प्रभुपाद ने इस्कॉन की नींव रखी थी। भागवत ने वहां स्वामी प्रभुपाद को पुष्पांजलि अर्पित की और आगंतुक पुस्तिका में अपने विचार लिखे। उन्होंने इस स्थान को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए लिखा कि यहां आकर वे खुद को "शुद्ध सात्विक प्रेम" की भावना से सराबोर महसूस कर रहे हैं।

इस्कॉन की इस अद्भुत वैश्विक यात्रा और इसकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कुछ बड़े आंकड़े भी सामने रखे:

  • 60 करोड़ प्रतियों का वितरण: इस्कॉन ने दुनिया भर में 80 से अधिक भाषाओं में भगवद गीता की लगभग 60 करोड़ प्रतियां वितरित की हैं।

  • विशाल वैश्विक नेटवर्क: वर्तमान में 120 से अधिक देशों में इस्कॉन के 1,300 से अधिक मंदिर स्थापित हैं।

इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमिशन के सदस्य और गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरांग दास ने बताया कि मोहन भागवत ने इस्कॉन को सनातन धर्म और हिंदू धर्म के कल्याणकारी संदेश को दुनिया के हर परिवार तक ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया।

मेडिसन स्क्वायर गार्डन में महा-संबोधन

आरएसएस प्रमुख ने सामाजिक और अंतर-धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण 'इंटरफेथ कॉन्फ्रेंस' की भी सह-अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में विभिन्न धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया, जहां समुदाय, प्रेम, करुणा और नम्रता जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। इस बैठक में इस्कॉन के संचार निदेशक अनुत्तम दास सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए।

इसके अतिरिक्त, मोहन भागवत न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध 'मेडिसन स्क्वायर गार्डन' में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने वाले हैं, जिसमें 6,000 से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस भव्य कार्यक्रम में वे हिंदू सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों के अमूल्य योगदान पर अपनी बात रखेंगे।

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