इजराइल-ईरान महायुद्ध (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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इजराइल-ईरान महायुद्ध: राष्ट्रपति भवन पर बमबारी और 787 की मौत, दुनिया पर तेल संकट का खतरा

Iran Israel conflict: इजराइल ने ईरान के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया, जिसमें 787 लोगों की मौत हो चुकी है। ट्रंप ने हमले का समर्थन किया है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।

प्रिया सिंह

US Israel Iran War 2026: पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका इजराइल ईरान युद्ध अब एक बहुत ही भयानक और विनाशकारी रूप अख्तियार कर चुका है। युद्ध के चौथे दिन आसमान से बरसते बमों ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों को पूरी तरह दहला दिया है। सैकड़ों मासूमों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरों ने पूरी दुनिया को गहरे सदमे और चिंता में डाल दिया है। इस संघर्ष की तपिश अब केवल सरहदों तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की जड़ों को भी हिला दिया है।

ईरान में तबाही और मौत का तांडव

इजराइली सेना ने ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद पर भारी मात्रा में घातक गोला-बारूद गिराया है। ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार अब तक लगभग 787 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। तेहरान का मेहराबाद एयरपोर्ट और कई मिसाइल फैक्ट्रियां इन हमलों में बुरी तरह नष्ट हो गई हैं जिससे वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।

परमाणु केंद्र और दूतावासों पर खतरा

संयुक्त राष्ट्र की संस्था आईएईए ने पुष्टि की है कि नतांज परमाणु केंद्र को हमलों में नुकसान पहुंचा है पर रेडिएशन का खतरा नहीं है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब और कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावासों पर ड्रोन से हमले किए हैं। इन हमलों के बाद अमेरिका ने एहतियात के तौर पर सऊदी अरब, कुवैत और बेरुत में अपने दूतावासों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है।

ट्रंप का बयान और बढ़ता तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ही इजराइल पर ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दबाव बनाया था। ट्रंप का मानना है कि ईरान की वायुसेना और रक्षा प्रणाली अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है और अब बातचीत का समय निकल चुका है। इधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि वे नर्क के द्वार खोल देंगे और सभी आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाएंगे।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

मिडिल ईस्ट की इस जंग ने कच्चे तेल के बाजार में आग लगा दी है और ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अमेरिकी शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक डाउ जोंस और नास्डैक में भी इस तनाव के कारण भारी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रिटेन ने भी सुरक्षा के मद्देनजर अपने युद्धपोत रवाना कर दिए हैं ताकि अपने सैन्य अड्डों की ड्रोन हमलों से रक्षा की जा सके।

भारतीयों की सुरक्षित घर वापसी

भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एयर इंडिया और इंडिगो की विशेष उड़ानों के जरिए रेस्क्यू शुरू किया है। तेहरान में फंसे अधिकतर भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंच दिया गया है और कई लोग अब अपने देश वापस लौट रहे हैं। युद्ध की विभीषिका के बीच अपनों का सुरक्षित घर लौटना उन परिवारों के लिए किसी बड़े चमत्कार और राहत से कम नहीं है।

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