डोनाल्ड ट्रंप,बेंजामिन नेतन्याहू (फोटो- सोशल मीडिया) 
विदेश

गाजा के लिए अगले 24 घंटे अहम, ट्रंप ने मिलने पहुंचे नेतन्याहू, सीयफायर का हो सकता है ऐलान

Trump-Netanyahu Meet: इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिले, गाजा के लिए शांति प्रस्ताव पर चर्चा की। अमेरिका ने युद्धविराम और बंधकों की रिहाई सहित शांति योजना पेश की।

अक्षय साहू

Trump-Netanyahu Meeting: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे। इस मुलाकात का मकसद गाजा के लिए शांति का प्रस्ताव आगे बढ़ाना है। दोनों की इस मुलाकात से पहले ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि वो गाजा में युद्धविराम करने के बिल्कुल करीब है। इसके चलते इस मीटिंग पर दुनियाभर की नजरें टिकी है।

ट्रंप की राष्ट्रपति बनने के बाद नेतन्याहू से चौथी मुलाकात है। नेतन्याहू लिमोजीन से आए और ट्रंप ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों ने हाथ मिलाए और अच्छे मूड में बात की। ट्रंप ने कहा, आप बहुत अच्छे लग रहे हैं, और नेतन्याहू ने भी जवाब दिया, आप भी बहुत अच्छे लग रहे हैं," फिर कैमरों की तरफ अंगूठा दिखाया।

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र पेश की शांति योजना

यह मुलाकात एक अहम समय पर हो रही है। पिछले हफ्ते अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में एक 21 पॉइंट वाली शांति योजना पेश की थी, जिसमें युद्ध खत्म करना, हमास के कब्जे में बंधकों को 48 घंटे में छोड़ना, और धीरे-धीरे इजरायल की गाजा से वापसी शामिल है। इस योजना में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच नए सिरे से बातचीत का भी प्रस्ताव है। ट्रंप ने 2024 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कई बार दावा कि था वो राष्ट्रपति बनते ही शांति स्थापित करेगें। हालांकि वो अपने पहले के प्रयास सफल नहीं हुए। इस मुलाकात में उनका मकसद नेतन्याहू के साथ बची हुई बातों को निपटाना था। नेतन्याहू के ऊपर भी दबाव था क्योंकि बंधकों के परिवार और जनता शांति चाहते थे, लेकिन अगर नेतन्याहू ज्यादा रुक गए तो उनके दक्षिणपंथी गठबंधन का समर्थन खो सकते थे।

मिस्र-कतर कर रहे मध्यस्थ

इजरायली अधिकारियों को योजना के कुछ हिस्से पसंद नहीं आए, जैसे गाजा में फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों की भूमिका और हमास के अधिकारियों से निपटने का तरीका। अरब देशों ने इस योजना का समर्थन किया है, लेकिन वे नेतन्याहू की वार्ता के बाद कुछ बदलाव चाहते हैं।

इसी बीच, मिस्र और कतर, जो पहले भी शांति प्रयासों में मध्यस्थ रहे हैं, अपनी चिंताएं जता रहे हैं। मिस्र चाहता है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण गाज़ा के प्रशासन में शामिल हो, जबकि कतर चाहता है कि बंधकों की रिहाई के बाद इजरायल समझौते का सही से पालन करे।

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