IRDAI Rules 5 Year Roadmap: बीमा नियामक आईआरडीएआई यानी IRDAI ने बीमा कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य प्रबंधन खर्चों को कम करने के लिए पांच साल का एक नया रोडमैप प्रस्तावित किया है। नियामक का मुख्य उद्देश्य अत्यधिक वितरक भुगतानों पर प्रभावी अंकुश लगाना और पॉलिसीधारकों के लिए बीमा लागत को कम करना है।
इस दूरगामी कदम से देश के वित्तीय सेवा क्षेत्र और इंश्योरेंस एग्रीगेटर्स में बड़ी हलचल पैदा हो गई है। इस नए प्रस्ताव का असर कई प्रमुख बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर प्लेटफॉर्म्स के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ने की संभावना जताई गई है।
भारतीय बीमा रेगुलेटर एवं विकास प्राधिकरण यानी IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन और मैनेजमेंट एक्सपेंस यानी EoM की लिमिट्स को कसने का कड़ा प्रपोजल रखा है।
इस कदम से देश के फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में भारी हलचल मच गई है क्योंकि रेगुलेटर अत्यधिक डिस्ट्रीब्यूटर पेमेंट्स पर कड़ा अंकुश लगाना चाहता है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए मैनेजमेंट एक्सपेंस की लिमिट को अगले 2 ईयर्स में घटाकर 15 प्रतिशत करने का प्रपोजल रखा गया है।
इसके बाद अगले 5 ईयर्स के भीतर लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का मैनेजमेंट एक्सपेंस घटाकर 12.5 प्रतिशत तक लाने की योजना बनाई गई है। वहीं जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह लिमिट ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम यानी GDPI के आधार पर तय करने का डिसीजन लिया गया है।
जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के मैनेजमेंट एक्सपेंस को 2 ईयर्स में घटाकर 25 प्रतिशत और 5 ईयर्स में 20 प्रतिशत तक लाने का प्रपोजल दिया गया है। रेगुलेटर का मानना है कि मैनेजमेंट एक्सपेंस में कमी आने से इंश्योरेंस सर्विसेज की ऑपरेशनल कॉस्ट घटेगी जिसका सीधा फायदा आम कस्टमर्स को मिलेगा।
IRDAI ने प्योर टर्म यानी प्योर टर्म लाइफ इंश्योरेंस के पहले ईयर के कमीशन पर सख्त कंट्रोल लगाने की सिफारिश की है। बैंक्स, ब्रोकर्स और एग्रीगेटर्स जैसी ओपन डिस्ट्रीब्यूशन इंस्टीट्यूशंस के लिए पहले ईयर का कमीशन अधिकतम 25 प्रतिशत तक लिमिट करने की बात कही गई है। इसके साथ ही इंश्योरेंस एजेंट्स के लिए प्योर टर्म पॉलिसी के फर्स्ट ईयर का कमीशन अधिकतम 30 प्रतिशत तक तय करने का प्रपोजल है।
इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस और मोटर इंश्योरेंस के डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन में भी भारी कटौती करने की सिफारिश की गई है। कमीशन में इस भारी कटौती से इंश्योरेंस एजेंट्स और ऑनलाइन ब्रोकर्स की कमाई के स्ट्रक्चर पर गहरा प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि रेगुलेटर का स्पष्ट उद्देश्य अत्यधिक डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट को कम करके पॉलिसीहोल्डर्स के लिए प्रीमियम को अफोर्डेबल बनाना है।
जेफरीज, मैक्वायरी, बर्नस्टीन और HSBC जैसे ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि इन प्रपोजल्स से डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों को बड़ा झटका लग सकता है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स के अनुसार पीबी फिनटेक यानी पॉलिसीबाजार जैसी डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों के रेवेन्यू पर निकट भविष्य में प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इसके विपरीत SBI लाइफ और LIC यानी भारतीय जीवन बीमा निगम जैसी बड़ी इंश्योरेंस कंपनियां इस बदलाव में पूरी तरह सेफ मानी जा रही हैं। SBI लाइफ और LIC का मौजूदा एक्सपेंस रेश्यो यानी ईओएम रेश्यो पहले से ही प्रपोज्ड 10 से 12.5 प्रतिशत के दायरे के करीब या उससे नीचे बना हुआ है।
कॉरेस्पॉन्डेंट संदीप कुमार की रिपोर्ट के अनुसार IRDAI के इस 5 ईयर के नए रोडमैप से पॉलिसीहोल्डर्स को कम कॉस्ट में बेहतर इंश्योरेंस फैसिलिटीज प्राप्त होंगी।