ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का ट्रंप पर हमला: इजरायल के कारण आम अमेरिकियों पर थोपा युद्ध का बोझ

Middle East Conflict: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर युद्ध थोपने का आरोप लगाया है और कहा है कि इसका भारी खर्च अब आम अमेरिकी नागरिकों को टैक्स के रूप में चुकाना पड़ेगा।

प्रिया सिंह

Rising Middle East War Costs: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में अमेरिका और इजरायल की रणनीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एक थोपी गई जंग करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष न केवल ईरान बल्कि आम अमेरिकियों की जेब पर भी भारी असर डालने वाला है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्होंने चेतावनी दी है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन को एक बहुत बड़े क्षेत्रीय संकट में धकेल रहे हैं।

थोपा गया युद्ध

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल और अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह युद्ध जबरन उन पर थोपा गया है। उन्होंने इस संघर्ष को "वॉर ऑफ चॉइस" यानी जानबूझकर चुनी गई जंग बताया है जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान को अस्थिर करना है। अराघची के अनुसार इजरायल के प्रधानमंत्री अमेरिकी नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं और पूरे क्षेत्र को भीषण तबाही की ओर ले जा रहे हैं।

भारी आर्थिक नुकसान

ईरानी विदेश मंत्री ने दावा किया है कि इस युद्ध के कारण अब तक लगभग 200 अरब डॉलर का भारी भरकम खर्च सामने आ चुका है। उन्होंने इसे तबाही की केवल एक शुरुआत बताया है और चेतावनी दी है कि यह खर्च भविष्य में ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। उन्होंने इसे "इजरायल फर्स्ट टैक्स" का नाम दिया है जिसका सीधा बोझ अब आम अमेरिकी मध्यम वर्ग के नागरिकों को उठाना पड़ेगा।

अमेरिका की भूमिका

अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों में "हम" जैसे शब्दों के प्रयोग पर सवाल उठाते हुए अमेरिका की सीधी भागीदारी का दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अमेरिकी समर्थन के साथ इजरायल ने अस्पतालों, स्कूलों और कई ऐतिहासिक स्थलों जैसे नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। उनके अनुसार यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है और अमेरिका इसमें बराबर का भागीदार माना जाएगा।

अमेरिका में अंदरूनी विरोध

अमेरिका के भीतर भी इस युद्ध को लेकर गहरी असहमति दिखाई दे रही है और डेमोक्रेटिक पार्टी के कई बड़े नेता इसे रोकने की मांग कर रहे हैं। टिम केन और एडम शिफ जैसे नेताओं का मानना है कि यह जंग गैरकानूनी है और सरकार जनता को सही जानकारी नहीं दे रही है। वहीं दूसरी ओर जो केंट जैसे अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है क्योंकि उनके अनुसार ईरान से कोई तत्काल खतरा नहीं था।

ट्रंप की रणनीति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट के इस संकट में फंसे हुए नजर आ रहे हैं और उन्होंने हजारों अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की योजना बनाई है। हालांकि इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स में ईरान को अमेरिका के लिए बहुत बड़ा खतरा नहीं माना गया है फिर भी सैन्य तैनाती जारी है। अब ट्रंप के सामने चुनौती यह है कि वे "अमेरिका फर्स्ट" की नीति अपनाते हैं या इस युद्ध में और गहराई तक उतरते हैं।

मानवीय संकट और भविष्य

इस युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के तेल और गैस प्लांटों में भारी आग लगी हुई है जिससे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को नुकसान हो रहा है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर फैलाए गए कथित झूठ के कारण यह संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ से वापसी कठिन है। अराघची ने स्पष्ट किया कि जब तक बाहरी हस्तक्षेप बंद नहीं होता तब तक क्षेत्रीय स्थिरता प्राप्त करना लगभग असंभव कार्य होगा।

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