Iran War Europe UK Terror Threat: मध्य पूर्व में जारी तनाव की तपिश अब सात समंदर पार यूरोप और ब्रिटेन तक महसूस की जाने लगी है। एक नई सुरक्षा रिपोर्ट में यह चिंताजनक खुलासा हुआ है कि ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब एक 'शैडो वॉर' का रूप ले सकता है जिससे सीधे तौर पर यूरोपीय देशों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद लंदन सहित कई प्रमुख शहरों में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 'शैडो वॉर' का अर्थ यह है कि इसमें देश सीधे तौर पर आमने-सामने की जंग लड़ने के बजाय छोटे लेकिन प्रभावी हमलों का सहारा लेते हैं। द सूफान ग्रुप द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों में मुख्य रूप से आगजनी, ड्रोन हमले और विशिष्ट समूहों को निशाना बनाकर की जाने वाली हिंसा शामिल हो सकती है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह रणनीति कम खर्चीली होने के बावजूद समाज में भारी डर और अस्थिरता पैदा करने में सक्षम है।
खुफिया जानकारी के अनुसार, ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई 'इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) पर यूरोप और ब्रिटेन में अस्थिरता फैलाने की योजना बनाने का आरोप है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि IRGC अपने स्थानीय समर्थकों और यहां तक कि आपराधिक गिरोहों का इस्तेमाल कर हमले करवा सकता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन हमलों के मुख्य सूत्रधार तक पहुँचना मुश्किल हो जाए और इसे महज एक आपराधिक घटना का रूप दिया जा सके। इन हमलों के प्राथमिक निशाने पर अमेरिका, यहूदी समुदाय और इजरायल से जुड़े संस्थान रहने की संभावना जताई गई है।
ब्रिटेन में हाल के दिनों में धार्मिक हिंसा और यहूदी विरोधी घटनाओं में तेजी देखी गई है। उत्तरी लंदन में हाल ही में यहूदी समुदाय की एंबुलेंस सेवा की चार गाड़ियों में आग लगाने की घटना ने सुरक्षा दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने इसे स्पष्ट रूप से एक नफरती हमला करार दिया है। इसके अलावा, केंसिंग्टन गार्डन जैसे व्यस्त इलाकों में संदिग्ध सामान मिलने के बाद पुलिस की विशेष टीमों को तैनात किया गया है और पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच की जा रही है।
वहीं, लंदन में सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि ईरान युद्ध के कारण वे पहले से कहीं अधिक सतर्क हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर इजरायली दूतावास पर ड्रोन हमले जैसे कुछ दावे गलत भी पाए गए हैं लेकिन एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।
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वर्तमान में इजरायल और लेबनान के बीच जो संघर्ष विराम चल रहा है उसे भी काफी कमजोर माना जा रहा है जिसका सीधा असर वैश्विक सुरक्षा पर पड़ रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व में स्थायी शांति बहाल नहीं होती, यूरोप पर मंडराता यह खतरा कम नहीं होगा।