Iran US Conflict Military Action Over Naval Blockade: मध्य पूर्व में एक बार फिर से युद्ध जैसे गंभीर हालात बन रहे हैं। ईरान ने अमेरिका को सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि वह अपनी समुद्री डकैती और गुंडागर्दी तुरंत बंद करे। ईरान के सरकारी प्रेस टीवी ने कहा है कि इस नाकेबंदी के खिलाफ जल्द ही बहुत बड़ी सैन्य कार्रवाई होगी। देश की सशस्त्र सेनाओं ने स्पष्ट किया है कि उनके धैर्य की भी एक निश्चित सीमा होती है।
होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की इस हठ और भ्रमपूर्ण कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव अब बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। सूत्रों के अनुसार, अगर दुश्मन ईरान की उचित शर्तें नहीं मानता तो उसे भयानक कार्रवाई देखने को मिलेगी। अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में लगातार और गैरकानूनी रूप से जब्त किया जा रहा है। ईरान के स्थायी प्रतिनिधि ने इसे कानूनी व्यापार में एक बहुत ही अनुचित और गैरकानूनी दखलअंदाजी करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने इस गंभीर मुद्दे पर सुरक्षा परिषद को कड़ा पत्र लिखा है। इस पत्र में अमेरिकी कार्रवाई को सीधे तौर पर पूरी दुनिया के सामने समुद्री डकैती के समान बताया गया है। अमेरिका की अटॉर्नी जीनीन पिरो ने एमटी मजेस्टिक और एमटी टिफनी जहाजों को जब्त करने की बात मानी है।
अमेरिका ने इन दोनों बड़े ईरानी जहाजों से लगभग 3.8 मिलियन बैरल तेल को अपने कब्जे में लिया है। होर्मुज स्ट्रेट में यह एकतरफा समुद्री नाकेबंदी 11 और 12 अप्रैल की महत्वपूर्ण घटनाओं के बाद से लगाई गई है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ बातचीत विफल होने के बाद यह सारा तनाव चरम पर पहुंच गया है।
इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई बड़े शहरों पर भयानक हमले किए थे। उस दुखद हमले में तत्कालीन सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और कई बेकसूर आम नागरिक मारे गए थे। इसके बाद 40 दिनों की भीषण लड़ाई चली और फिर आठ अप्रैल को दोनों पक्षों में युद्धविराम लागू हुआ था।
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अमेरिका के इस युद्ध के जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर कड़े प्रहार किए। ईरान ने लगातार आधुनिक ड्रोन और मिसाइलों से बड़ा हमला करके अपनी ताकत और सैन्य क्षमता का पूरा प्रदर्शन किया। इसके तुरंत बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी सुरक्षा और सैन्य पकड़ मजबूत कर ली है।