Ayatollah Ali Khamenei Funeral: ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के चार महीने बाद उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। 4 जुलाई को उनके जनाजे की रस्में शुरू हो गई हैं, जो 9 जुलाई तक चलेगी और इसके बाद उनके शरीर को दफना दिया जाएगा। इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिसके मुताबिक, ईरानी सरकार खामेनेई के जनाजे से पहले हजारों कब्रें खुदवा रही है।
जानकारी के मुताबिक, जमर्नी के मीडिया हाउस WELT तेहरान से मिली जानकारी के आधार पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि ईरान की सरकार को सुप्रीम लीडर खामेनेई के जनाजे में 1,500 से 3,000 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई है। इसके चलते ईरान की सरकार ने पर्दे के पीछे इस स्थिति के लिए तैयारियां भी कर ली हैं।
ईरान सरकार ने आशंका जताई है कि अली खामेनेई के जनाजे में देशभर के लोग शामिल होंगे। सरकार के मुताबिक जनाजे में डेढ़ से दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। ईरान की सरकार जनाजे में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को लेकर डरी हुई है। ईरान में बड़े नेताओं के जनाजे पर भगदड़ और हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। सरकार को आशंका है कि खामेनेई के जनाजे में भी भगदड़ और अन्य घटनाएं हो सकती हैं। जिसमें 1,500 से 3,000 लोगों की जान जा सकती है।
सरकार ने इन्हीं आशंकाओं के चलते एक हजार से अधिक कब्रों का इंतजाम किया है। तेहरान में नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि, हमने सच में कब्रें तैयार की हैं। जनाजे में अगर भगदड़ या गर्मी के कारण 3,000 लोगों की मौत भी हो जाती है, तो स्थिति को काबू से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि क्योंकि इतनी भीषण गर्मी और भीड़ के बीच भगदड़ होने की संभावनाएं अधिक है।
इसी बीच एक पत्रकार ने दावा किया है, नेशनल क्राइसिस मैनेजमेंट और ईरानी रेड क्रिसेंट ने ईरान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट मोहम्मद-रेजा आरिफ के एक सीक्रेट चिट्ठी भेजी है। चिट्ठी में कहा गया है कि जनाजे के दौरान भगदड़ और दूसरी घटनाओं में लोगों की मौत की आशंका के चलते तेहरान के कई कब्रिस्तानों में हजारों कब्रें तैयार की गई हैं।
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ईरान सरकार के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह ईरान में बड़े नेताओं के जनाजे के दौरान लोगों की मौतों का इतिहास भी है। 1989 में जब ईरान के पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खुमैनी का जनाजा निकाला गया था, तब भगदड़ में 8 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग बुरी तरह घायल हो गए थे। इसी तरह साल 2020 में जब कुर्द्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद उनका जनाजा निकाला गया था, जब करमान शहर में अचानक मची भगदड़ के दौरान 56 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 200 लोग घायल हो गए थे। यही वजह है कि ईरान सरकार खामेनेई के जनाजे में भगदड़ को लेकर डरी हुई है।