ईरान में अपनों के खिलाफ 'विदेशी सेना', फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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ईरान में अपनों के खिलाफ 'विदेशी सेना'! प्रदर्शन कुचलने के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी लड़ाके, जानें क्या है सच?

Iran Protests: एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान सरकार ने अपने ही नागरिकों के विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए 5,000 इराकी लड़ाकों का सहारा लिया है, क्योंकि स्थानीय सुरक्षाकर्मी फायरिंग से हिचक रहे थे।

अमन उपाध्याय

Iraqi Fighters in Iran: ईरान में लंबे समय तक चले सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने के लिए एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। स्रोतों के अनुसार, खामेनेई के नेतृत्व वाले धार्मिक शासन ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए विदेशी शिया मिलिशिया (मलेशिया) का इस्तेमाल किया है।

यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान की कई सुरक्षा इकाइयाँ और सुरक्षाकर्मी अपने ही देश के नागरिकों पर बल प्रयोग करने या गोली चलाने से हिचक रहे थे। इसी हिचकिचाहट को देखते हुए दमन की जिम्मेदारी उन अरबी भाषा बोलने वाली मिलिशियाओं को सौंप दी गई जिनका प्रदर्शनकारियों से कोई स्थानीय लगाव नहीं था।

तीर्थयात्रियों के भेष में दाखिल हुए लड़ाके

CNN की एक रिपोर्ट में एक यूरोपीय सैन्य स्रोत और इराकी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले कुछ हफ्तों में लगभग 5,000 इराकी लड़ाके ईरान में दाखिल हुए हैं। ये लड़ाके कोई साधारण घुसपैठिए नहीं थे बल्कि इन्होंने सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए 'धार्मिक तीर्थयात्रियों' का भेष धारण कर रखा था। जानकारी के अनुसार, इन लड़ाकों ने दो प्रमुख दक्षिणी सीमा चौकियों मायसान प्रांत के शैब और वासित प्रांत के जुर्बातिया के जरिए ईरान की सीमा में प्रवेश किया। इन विदेशी लड़ाकों की तैनाती की खबरें उस समय तेज हुईं जब ईरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की मौतों का आंकड़ा अचानक बढ़ने लगा।

कौन हैं ये लड़ाके और क्यों बुलाई गई मदद?

ये लड़ाके इराक की 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज' के तहत काम करने वाले शक्तिशाली समूहों से जुड़े हैं जिनमें काताइब हिज्बुल्लाह, हरकत हिज्बुल्लाह अल-नुजबा, काताइब सैय्यद अल-शुहादा और बद्र संगठन जैसे नाम शामिल हैं। कुर्द मानवाधिकार संगठन 'हेंगॉ' के मुताबिक, शासन को यह सख्त कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि कुछ ईरानी सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। वर्तमान में, इन इराकी लड़ाकों को प्रमुख सरकारी इमारतों और सैन्य मुख्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया है।

मौतों का बढ़ता आंकड़ा और ईरान का पलटवार

इन प्रदर्शनों की कीमत बहुत भारी रही है। मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार, अब तक लगभग 2,677 लोगों की जान जा चुकी है जबकि निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी का दावा है कि यह संख्या 12,000 के पार हो सकती है। दूसरी ओर, ईरान सरकार इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है।

ईरानी मीडिया का दावा है कि यह हिंसा अमेरिका और इजरायल समर्थित सशस्त्र घुसपैठियों की वजह से हुई है। ईरान के खुफिया मंत्रालय ने करीब 3,000 लोगों को आतंकी समूहों का सदस्य बताकर गिरफ्तार करने की पुष्टि की है और विदेशी लड़ाकों के शामिल होने की रिपोर्टों को अब तक 'अपुष्ट' करार दिया है।

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